BRICS Traditional Sports 2026: अहमदाबाद में 10 देशों ने दिखाए पारंपरिक खेल
गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित BRICS Traditional and Indigenous Sports Showcase 2026 में 10 देशों ने भाग लिया। जानिए मनसुख मांडविया के प्रस्ताव, भारत के मल्लखंभ और कलारीपयट्टू सहित विभिन्न देशों के पारंपरिक खेलों की खास बातें।
अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद स्थित वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नारणपुरा में ब्रिक्स पारंपरिक एवं स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 10 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर अपनी पारंपरिक खेल विरासत और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षित करना, विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद बढ़ाना और ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना रहा।
केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की मौजूदगी में कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसमें खिलाड़ियों, पारंपरिक खेलों के जानकारों, तकनीकी अधिकारियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
खेलों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित हो रहे खेल पारिस्थितिकी तंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, खिलाड़ियों के कल्याण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को खेल विकास की रणनीति में शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने पारंपरिक खेलों को भी देश की खेल व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियां खिलाड़ियों को अवसर देने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद कर सकती हैं।
खेल क्षेत्र में निवेश और खेलो इंडिया का उल्लेख
केंद्रीय मंत्री ने खेलो इंडिया पहल का जिक्र करते हुए खेल क्षेत्र में निवेश और जनभागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने लगभग 3.76 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया और कहा कि खेल सुविधाओं, प्रशिक्षण तथा प्रतिभाओं के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना जरूरी है।
सरकार की खेल संबंधी पहलों का उद्देश्य अधिक लोगों को खेल गतिविधियों से जोड़ना और खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना है।
पारंपरिक खेलों के संरक्षण के लिए तीन प्रस्ताव
ब्रिक्स देशों के बीच पारंपरिक एवं स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देने के लिए मनसुख मांडविया ने तीन प्रस्ताव सामने रखे।
- पारंपरिक खेलों का संग्रह: विभिन्न खेलों के इतिहास, सांस्कृतिक महत्व, नियमों, उपकरणों और मैदान संबंधी जरूरतों का दस्तावेजीकरण करने के लिए स्वैच्छिक ब्रिक्स संग्रह तैयार करने का सुझाव दिया गया।
- विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान: खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, शोधकर्ताओं, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
- भविष्य के आयोजनों में प्रदर्शन: आगामी ब्रिक्स खेल आयोजनों में पारंपरिक एवं स्वदेशी खेलों को नियमित रूप से प्रदर्शित करने की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव रखा गया।
इन सुझावों का उद्देश्य विभिन्न देशों के पारंपरिक खेलों से जुड़े ज्ञान को सुरक्षित रखना और उनके बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
10 देशों ने प्रदर्शित की अपनी खेल विरासत
कार्यक्रम में शामिल देशों ने अपने-अपने पारंपरिक खेलों और शारीरिक कौशल का प्रदर्शन किया। भारत सहित कई देशों की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक विविधता और खेल परंपराओं की विशेषताओं को सामने रखा।
भारत ने मल्लखंभ, योगासन और कलारीपयट्टू के जरिए अपनी पारंपरिक शारीरिक साधना और खेल विरासत का प्रदर्शन किया। चीन की ओर से वुशु, लायन डांस और हेल्थ चीगोंग प्रस्तुत किए गए, जबकि ब्राजील ने कैपोइरा, स्वदेशी ब्लोपाइप और लकड़ी के लट्ठों की दौड़ जैसी गतिविधियां दिखाईं।
बेलारूस ने गोरोदकी और बोलीविया ने लुचा दे चोलितास, टिंकू, रायुएला, ट्रोम्पो, काचिनास तथा बोरी दौड़ जैसे खेल प्रस्तुत किए।
ईरान, कजाखस्तान और रूस के खेल भी रहे आकर्षण
ईरान ने जुर्खानेह, हफ्त संग और घानियेह जैसे पारंपरिक खेलों को प्रदर्शित किया। कजाखस्तान की ओर से असिक अतु, तोगिजकुमालक और कजाख कुरेसी प्रस्तुत किए गए। वहीं, रूस ने गोरोदकी और साम्बो के माध्यम से अपनी खेल परंपराओं को दर्शाया।
दक्षिण अफ्रीका ने कगाती और इंटोंगा, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने अल तब्बाह खेल का प्रदर्शन किया। इन गतिविधियों के जरिए दर्शकों और प्रतिभागियों को अलग-अलग देशों की खेल शैलियों और उनसे जुड़े सांस्कृतिक संदर्भों को जानने का अवसर मिला।
फिट इंडिया अभियान के जरिए फिटनेस को बढ़ावा
कार्यक्रम में फिट इंडिया मूवमेंट का भी उल्लेख किया गया। मनसुख मांडविया ने ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान के तहत साइकिलिंग और शारीरिक गतिविधियों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत प्रत्येक रविवार तीन लाख से अधिक स्थानों पर 50 लाख से ज्यादा लोगों की भागीदारी दर्ज की गई है। उनके अनुसार, इस पहल के 94 कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अभियान का उद्देश्य फिटनेस को रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए लोगों को प्रेरित करना है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ आयोजन
खेल प्रदर्शनों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं और समापन पर भाग लेने वाली टीमों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम ने पारंपरिक खेलों के संरक्षण, सामुदायिक ज्ञान को आगे बढ़ाने और खेलों में व्यापक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
ब्रिक्स पारंपरिक एवं स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 का उद्देश्य खेलों के माध्यम से विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक समझ, मित्रता और सहयोग को बढ़ावा देना रहा।
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