मार्को रुबियो 17 अक्टूबर से भारत दौरे पर, ऊर्जा सहयोग पर होगी चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्टूबर में भारत के मुंबई और गुजरात के जामनगर का दौरा करेंगे। यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग, भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों और व्यावसायिक निवेश के अवसरों पर बातचीत होगी। भारत से पहले वह उज्बेकिस्तान के समरकंद में C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होंगे।
US-India Relations: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर 2026 के बीच उज्बेकिस्तान और भारत की यात्रा करेंगे। भारत में वह मुंबई और गुजरात के जामनगर जाएंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशना और दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देना है। यह इस साल रुबियो की दूसरी भारत यात्रा होगी। <Cite refs={["turn145835search0","turn145835news21"]}/>
ऊर्जा सहयोग और निवेश पर होगी चर्चा
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रुबियो भारत में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देश द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने, क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर विचार साझा करने तथा ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा करेंगे।
रुबियो की कारोबारी प्रतिनिधियों से भी मुलाकात प्रस्तावित है। बातचीत में व्यावसायिक निवेश और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका व्यापार संबंधों तथा ऊर्जा नीति से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। <Cite refs={["turn145835search1","turn145835search17"]}/>
जामनगर क्यों है महत्वपूर्ण?
गुजरात का जामनगर रिलायंस इंडस्ट्रीज के बड़े रिफाइनिंग परिसर के लिए जाना जाता है। यह परिसर दुनिया की सबसे बड़ी एकल-स्थल तेल रिफाइनिंग सुविधाओं में शामिल है। ऐसे में ऊर्जा सहयोग को यात्रा के प्रमुख एजेंडे में शामिल किए जाने के कारण जामनगर का दौरा खास महत्व रखता है।
हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने जामनगर को यात्रा कार्यक्रम में शामिल करने के पीछे कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया है। इसलिए इस दौरे को किसी एक परियोजना या समझौते से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। <Cite refs={["turn145835search0","turn145835news19"]}/>
रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी अहम
रुबियो की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों में चर्चा का विषय बनी हुई है। वाशिंगटन रूस की ऊर्जा आय से जुड़े दबाव के उपायों पर जोर देता रहा है, जबकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आपूर्ति के विकल्पों को ध्यान में रखता है।
इस पृष्ठभूमि में ऊर्जा सहयोग पर होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग की घोषित यात्रा-प्राथमिकताओं में ऊर्जा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और निवेश का उल्लेख है; रूस से तेल खरीद पर किसी विशिष्ट बैठक या निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। <Cite refs={["turn145835news21","turn145835search17"]}/>
भारत से पहले उज्बेकिस्तान में C5+1 बैठक
भारत पहुंचने से पहले रुबियो उज्बेकिस्तान के समरकंद में C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर अमेरिका के साथ मध्य एशिया के पांच देश—कजाकिस्तान, किर्गिज गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान—शामिल होते हैं।
समरकंद में रुबियो इन देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, उनके साथ 200 से अधिक कारोबारी नेताओं वाला अमेरिकी वाणिज्यिक प्रतिनिधिमंडल भी होगा। इसका उद्देश्य अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापारिक तथा निवेश सहयोग को बढ़ावा देना है। <Cite refs={["turn145835search0","turn145835search13"]}/>
इस साल मई में भी भारत आए थे रुबियो
मार्को रुबियो इससे पहले मई 2026 में भारत आए थे। उस दौरान उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। अक्टूबर का प्रस्तावित दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा संबंधों पर आगे बातचीत का अवसर होगा। <Cite refs={["turn145835search0","turn145835search14"]}/>
आगामी बैठकों के नतीजों से यह स्पष्ट होगा कि भारत और अमेरिका ऊर्जा सहयोग, निवेश तथा व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए किन क्षेत्रों में ठोस कदम उठाने पर सहमत होते हैं।
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