सत्या नडेला को ट्रंप का सम्मान, माइक्रोसॉफ्ट पर ग्रीन कार्ड कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला को तकनीकी नवाचार में योगदान के लिए सम्मानित किया। इसी दिन जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर H-1B वीजा प्रणाली के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। अमेरिकी प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल और अन्य आईटी कंपनियों के PERM कार्यक्रम पर कार्रवाई की घोषणा की। जानिए इस फैसले का भारतीय आईटी पेशेवरों और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर क्या संभावित असर पड़ सकता है।
अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर सख्ती और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की नीति के बीच ट्रंप प्रशासन के दो अलग-अलग रुख सामने आए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के भारतीय मूल के सीईओ सत्या नडेला को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पदक से सम्मानित किया। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट समेत कई तकनीकी कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों से जुड़े आव्रजन कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।
नडेला को मिला राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पदक
8 अक्टूबर को आयोजित ‘न्यू गोल्डन एज’ समिट में ट्रंप ने छह प्रमुख तकनीकी हस्तियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला के अलावा एलन मस्क, सर्गेई ब्रिन, जेन्सेन हुआंग, लिसा सु और माइकल डेल शामिल थे।
नडेला को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पदक प्रदान किया गया। ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट को नई दिशा देने, क्लाउड कंप्यूटिंग कारोबार को मजबूत बनाने और आधुनिक सॉफ्टवेयर तकनीक को दुनिया भर के कारोबारियों, विद्यार्थियों तथा उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की।
ट्रंप के अनुसार, नडेला के नेतृत्व में माइक्रोसॉफ्ट ने तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को विकसित किया और उन्नत कंप्यूटिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े क्षेत्रों में अपनी भूमिका मजबूत की।
हैदराबाद में जन्मे सत्या नडेला ने 2014 में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ का पद संभाला था। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस सम्मान के लिए ट्रंप का आभार व्यक्त किया। नडेला ने कहा कि वह इस सम्मान से विनम्र महसूस कर रहे हैं और अमेरिका में नवाचार को आगे बढ़ाने तथा देश की समृद्धि में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
माइक्रोसॉफ्ट पर क्यों हुई कार्रवाई?
नडेला को सम्मानित किए जाने से कुछ घंटे पहले जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में माइक्रोसॉफ्ट की आव्रजन संबंधी नीतियों पर सवाल उठाए। वेंस ने दावा किया कि कंपनी ने लगभग 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि उसे H-1B वीजा के तहत करीब 6,300 मंजूरियां और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड मिले।
वेंस ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर नियुक्त करके अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन पर दबाव डालती हैं। हालांकि, छंटनी किए गए कर्मचारियों की जगह सीधे विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त किए जाने का आरोप अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि ऐसा वास्तव में हुआ था।
माइक्रोसॉफ्ट ने अपने पक्ष में कहा कि अमेरिका में उसके कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा अमेरिकी नागरिकों का है। कंपनी के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष में दाखिल किए गए उसके लगभग 6,000 H-1B आवेदनों में करीब 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों के वीजा विस्तार या उनकी स्थिति में बदलाव से संबंधित थे। कंपनी ने कहा कि वह प्रशासन को अतिरिक्त जानकारी देने के लिए तैयार है।
माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और भारतीय आईटी कंपनियों पर PERM प्रतिबंध
अमेरिकी श्रम विभाग ने संघीय जांच का हवाला देते हुए माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम यानी PERM से निलंबित करने की घोषणा की। इसके साथ कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जानकारी दी गई।
अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित कंपनियों के नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और रोजगार आधारित आव्रजन प्रणाली में संभावित गड़बड़ियों की जांच करना है।
PERM, अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद पर विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
यह कार्रवाई अपने आप पहले से जारी सभी H-1B वीजा रद्द नहीं करती और न ही पहले से प्राप्त स्थायी निवास का दर्जा स्वतः समाप्त करती है। हालांकि, प्रभावित कंपनियों के उन कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में बाधा आ सकती है, जिनके आवेदन PERM प्रमाणन पर निर्भर हैं।
भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ सकता है असर
इस फैसले पर भारत के तकनीकी क्षेत्र की नजर है, क्योंकि सूची में शामिल कई कंपनियों का भारतीय आईटी उद्योग में बड़ा कारोबार है और वे अमेरिका में भी बड़ी संख्या में तकनीकी पेशेवरों को रोजगार देती हैं।
H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाली नौकरियों के लिए योग्य विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। दूसरी ओर, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का एक संभावित रास्ता है।
PERM प्रक्रिया में रुकावट आने से उन भारतीय कर्मचारियों की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जो लंबे समय तक अमेरिका में काम करने या स्थायी निवास हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं। इसका वास्तविक प्रभाव संबंधित आवेदन की स्थिति, कर्मचारी की वीजा श्रेणी और लागू आव्रजन नियमों पर निर्भर करेगा।
वेंस बोले- अमेरिका में निवेश करने वाली कंपनियों का समर्थन जारी रहेगा
वेंस ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ऐसी कंपनियों का समर्थन करना चाहता है जो अमेरिका में निवेश करें, तकनीकी विकास को आगे बढ़ाएं और घरेलू रोजगार को प्राथमिकता दें। उन्होंने यह भी कहा कि असाधारण कौशल रखने वाले विदेशी विशेषज्ञों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने एलन मस्क और एएमडी की सीईओ लिसा सु का उदाहरण देते हुए कहा कि विशिष्ट प्रतिभा वाले लोगों की विशेषज्ञता अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, भविष्य में नवाचार करने वाले विद्यार्थियों, युवा इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की क्षमता का शुरुआती करियर में आकलन करना आसान नहीं होता।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन ने हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड, एमआईटी और कैलटेक समेत नौ प्रमुख अमेरिकी विश्वविद्यालयों में J-1 वीजा के इस्तेमाल की जांच की घोषणा भी की। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ संस्थानों में विदेशी शोधकर्ताओं से संबंधित कार्यक्रमों का इस्तेमाल अनुचित तरीके से किया जा सकता है। इन आरोपों की जांच जारी है।
तकनीकी नवाचार और आव्रजन नियंत्रण के बीच संतुलन की चुनौती
समिट के दौरान ट्रंप ने वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत तकनीक को आगे बढ़ाने की योजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें क्वांटम कंप्यूटिंग, ‘जेनेसिस मिशन’ और सुपरइंटेलिजेंस से जुड़ी पहल शामिल हैं। ऐसे क्षेत्रों में प्रगति के लिए उच्चस्तरीय विशेषज्ञता, शोध और कुशल तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होगी।
यही वजह है कि अमेरिकी प्रशासन के सामने घरेलू रोजगार की रक्षा करने और दुनिया भर से प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
सत्या नडेला को मिला सम्मान और उसी दिन माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियों के खिलाफ घोषित कार्रवाई इस बहस को सामने लाती है। एक ओर अमेरिका तकनीकी नेतृत्व और नवाचार को बढ़ावा देना चाहता है, तो दूसरी ओर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति तथा स्थायी निवास से जुड़ी प्रक्रियाओं पर निगरानी सख्त कर रहा है।
भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय पेशेवर लंबे समय से अमेरिकी प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। आने वाले समय में संबंधित जांचों के नतीजे और PERM प्रतिबंधों की अवधि यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि इन उपायों का भारतीय आईटी कंपनियों और उनके कर्मचारियों पर कितना असर पड़ता है।
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