एस. जयशंकर की कोट डी आइवर यात्रा, रक्षा और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कोट डी आइवर की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अलासाने ओत्तारा और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, आतंकवाद रोधी प्रयासों, व्यापार, निवेश, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की।

Oct 09, 2026 - 11:38
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एस. जयशंकर की कोट डी आइवर यात्रा, रक्षा और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम अफ्रीकी देश कोट डी आइवर की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अलासाने ओत्तारा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच विकास, व्यापार और आपसी सहयोग को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत और कोट डी आइवर की साझेदारी आपसी सम्मान तथा विकास और समृद्धि के साझा लक्ष्यों पर आधारित है।

तीन अफ्रीकी देशों की यात्रा के दूसरे चरण में जयशंकर बुधवार को घाना से कोट डी आइवर पहुंचे। इसके बाद उनके इथियोपिया जाने का कार्यक्रम रहा। इस दौरे का उद्देश्य अफ्रीकी देशों के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और विस्तार देना है।

राष्ट्रपति अलासाने ओत्तारा से हुई अहम मुलाकात

राष्ट्रपति ओत्तारा से मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें कोट डी आइवर के राष्ट्रपति से मिलकर प्रसन्नता हुई। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।

विदेश मंत्री ने भारत और कोट डी आइवर के संबंधों को आपसी विश्वास, सम्मान और साझा विकास की भावना पर आधारित बताया। उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत, दीर्घकालिक और पारस्परिक लाभ वाली साझेदारी को आगे बढ़ाने के राष्ट्रपति के दृष्टिकोण की सराहना की।

रक्षा और आतंकवाद रोधी सहयोग पर चर्चा

आबिदजान में जयशंकर ने कोट डी आइवर के उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री तेने बिराहिमा ओत्तारा से भी मुलाकात की। बातचीत में दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और सुरक्षा संबंधी साझेदारी पर ध्यान दिया गया।

जयशंकर के मुताबिक, दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संस्थागत स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ाने के माध्यम से रक्षा तथा आतंकवाद रोधी क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने की संभावनाओं पर विचार किया।

कोट डी आइवर के रक्षा मंत्री ने भी बैठक को दोनों देशों के बीच सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यह चर्चा शांति, सुरक्षा और विकास के लिए रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

व्यापार, कृषि और स्वास्थ्य सेवा में सहयोग बढ़ाने पर जोर

विदेश मंत्री जयशंकर ने कोट डी आइवर की विदेश मामलों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री नियाले काबा के साथ भी बातचीत की। इस दौरान व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत का जन-केंद्रित सहयोग कोट डी आइवर की विकास संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप होना चाहिए।

बैठक में बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग और संवाद को और गहरा करने के तरीकों पर भी विचार किया गया।

ITEC कार्यक्रम से अफ्रीकी देशों में क्षमता निर्माण को बढ़ावा

कोट डी आइवर में जयशंकर ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों में विकास साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने जोर दिया कि भारत की ओर से दिया जाने वाला सहयोग संबंधित अफ्रीकी देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार होना चाहिए।

वर्ष 1964 में शुरू किया गया ITEC कार्यक्रम भारत की अंतरराष्ट्रीय क्षमता निर्माण पहलों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से विभिन्न देशों के प्रतिभागियों को प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। यह कार्यक्रम भारत और उसके साझेदार देशों के बीच ज्ञान तथा अनुभव साझा करने का माध्यम भी है।

भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिले जयशंकर

विदेश मंत्री ने कोट डी आइवर में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत की। उनकी यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भारत की अफ्रीका नीति के प्रमुख पहलुओं में शामिल है। इसके साथ ही भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझेदारी और विकास सहयोग को भी विस्तार देना चाहता है।

जयशंकर की इस यात्रा के दौरान हुई बैठकों से भारत और कोट डी आइवर के बीच मौजूदा संबंधों को मजबूत करने तथा नए सहयोग के अवसर तलाशने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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