संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की पहचान बरकरार, भारत के सहयोग से मिल रही समाचार सामग्री

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की वैश्विक पहुंच बढ़ाने में भारत का योगदान महत्वपूर्ण है। भारतीय सहयोग से UNDGC हिंदी में समाचार और सोशल मीडिया सामग्री उपलब्ध कराता है। पी. हरीश, सी.पी. जोशी और अंडोरा के प्रतिनिधि ने बहुभाषावाद तथा भाषा कूटनीति के महत्व पर विचार रखे।

Oct 09, 2026 - 11:28
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संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की पहचान बरकरार, भारत के सहयोग से मिल रही समाचार सामग्री

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की पहुंच बढ़ाने के लिए भारत की ओर से किए जा रहे स्वैच्छिक सहयोग की अहम भूमिका है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक संचार विभाग (UNDGC) भारत के सहयोग से हिंदी में समाचार और सोशल मीडिया सामग्री उपलब्ध करा रहा है। इससे दुनिया भर में हिंदी समझने वाले लोगों तक संयुक्त राष्ट्र की सूचनाएं पहुंच रही हैं।

गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम में पी. हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में हाल ही में पारित बहुभाषावाद से संबंधित प्रस्ताव में हिंदी के गैर-आधिकारिक भाषा के रूप में उपयोग को जारी रखने की व्यवस्था का उल्लेख है। उन्होंने भारत की ‘हिंदी एट यूएन’ पहल को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

‘हिंदी एट यूएन’ परियोजना में भारत का स्वैच्छिक योगदान

पी. हरीश के मुताबिक, भारत संयुक्त राष्ट्र की ‘हिंदी एट यूएन’ परियोजना को स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग देता रहा है। इस पहल के तहत संयुक्त राष्ट्र की खबरों और सूचनाओं को हिंदी में तैयार करके व्यापक स्तर पर साझा किया जाता है।

इसका उद्देश्य हिंदी बोलने और समझने वाले लोगों के लिए संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों, वैश्विक मुद्दों और संस्थागत पहलों से जुड़ी जानकारी को अधिक सुलभ बनाना है।

बहुभाषावाद को बढ़ावा देने वाला प्रस्ताव पारित

अंडोरा के सह-प्रायोजन वाला बहुभाषावाद संबंधी प्रस्ताव पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित हुआ था। इसमें गैर-आधिकारिक भाषाओं के सांस्कृतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व को रेखांकित किया गया है।

प्रस्ताव के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों में विभिन्न भाषाओं की भूमिका प्रभावी प्रतिनिधित्व और भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें यह भी दोहराया गया कि प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में गैर-आधिकारिक भाषा में अपना वक्तव्य दे सकते हैं।

पी. हरीश ने कहा कि भारत बहुभाषावाद का लगातार समर्थन करता रहा है और इससे संबंधित प्रस्तावों का सह-प्रायोजक भी बना है।

भाषा लोगों और संस्कृतियों को जोड़ने का माध्यम

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विचारों का उल्लेख करते हुए पी. हरीश ने कहा कि भाषा का उद्देश्य लोगों और उनकी संस्कृतियों को जोड़ना होना चाहिए, न कि उनके बीच दूरी पैदा करना।

उन्होंने हिंदी की वैश्विक पहुंच पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, हिंदी भारत की सीमाओं से आगे तक अपनी पहचान बना चुकी है और भारतीय विचारों, कहानियों तथा सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय, साहित्य, फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रसार का अहम माध्यम बताया।

अंडोरा ने भाषा कूटनीति के महत्व को रेखांकित किया

प्रस्ताव के सह-प्रायोजक अंडोरा के स्थायी प्रतिनिधि जोआन फोर्नेर रोविरा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 1 अंतरराष्ट्रीय सहयोग, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं के सम्मान को बढ़ावा देने पर जोर देता है।

उन्होंने भाषा को इन लक्ष्यों की प्राप्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भाषाएं कूटनीति की प्रभावी साधनों में शामिल हैं।

2018 के समझौते से हिंदी में मिल रही संयुक्त राष्ट्र की खबरें

भाजपा सांसद सी.पी. जोशी ने कहा कि हिंदी की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग और भारत के बीच वर्ष 2018 में एक समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था।

इस समझौते के तहत भारत के स्वैच्छिक वित्तीय सहयोग से संयुक्त राष्ट्र की समाचार सामग्री हिंदी में उपलब्ध कराई जाती है। जोशी के अनुसार, पिछले वर्ष इस समझौते को पांच वर्ष के लिए नवीनीकृत किया गया था।

उन्होंने भारत की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सभी भाषाएं और बोलियां साझा विरासत का हिस्सा हैं तथा हिंदी इस भाषाई विविधता का महत्वपूर्ण अंग है।

भारतीय भाषाओं को सीखने पर भी जोर

अमित शाह ने भारतीय भाषाओं के बीच आपसी समझ और जुड़ाव बढ़ाने के लिए लोगों को अपनी मातृभाषा के अलावा एक अन्य भारतीय भाषा सीखने के लिए प्रेरित करने की बात कही। उन्होंने इस विचार को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना से जोड़ते हुए भाषाई विविधता को देश की ताकत बताया।

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी सामग्री का विस्तार भारत की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके जरिए हिंदी समझने वाले लोगों को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों की जानकारी अपनी भाषा में मिलती है।

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