राजनाथ सिंह ने IIT से रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी तकनीक बढ़ाने का किया आह्वान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने IIT कानपुर के ‘ग्रेटर देन अस’ धनसंग्रह अभियान के शुभारंभ पर कहा कि शैक्षणिक अनुसंधान को रक्षा क्षेत्र की परिचालन जरूरतों के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। उन्होंने स्वदेशी तकनीक, AI, साइबर सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में संस्थानों तथा उद्योग के सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया।

Oct 15, 2026 - 09:43
Updated: 7 hours ago
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राजनाथ सिंह ने IIT से रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी तकनीक बढ़ाने का किया आह्वान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में तकनीकी क्षमता की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) से शैक्षणिक अनुसंधान को सशस्त्र बलों की परिचालन जरूरतों और रक्षा उद्योग की मांगों के अनुरूप विकसित करने का आह्वान किया।

बुधवार को दिल्ली में IIT कानपुर के ‘ग्रेटर देन अस’ धनसंग्रह अभियान की शुरुआत के अवसर पर संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि तेजी से बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए स्वदेशी तकनीकों का विकास और उनका इस्तेमाल तेज करना जरूरी है। इसके लिए सशस्त्र बलों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), शैक्षणिक संस्थानों, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी उद्योग के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया।

आत्मनिर्भर भारत के लिए तकनीकी क्षमता जरूरी

राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य सरकार के विकसित भारत के दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य ऐसा देश बनाना है, जो तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ आर्थिक प्रतिस्पर्धा में भी मजबूत हो और नवाचार के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए।

उन्होंने कहा कि भारत को केवल दूसरे देशों की विकसित तकनीक का उपयोग करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ज्ञान और प्रौद्योगिकी के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। स्वदेशी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने से देश की तकनीकी क्षमता तथा रणनीतिक आत्मनिर्भरता मजबूत हो सकती है।

AI और स्वायत्त प्रणालियां बदल रही हैं युद्ध का स्वरूप

रक्षा मंत्री ने उभरती प्रौद्योगिकियों के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वायत्त प्रणालियां, मानवरहित प्लेटफॉर्म, उन्नत सेंसर, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष आधारित तकनीकें सैन्य अभियानों के तौर-तरीकों में बदलाव ला रही हैं।

ऐसे माहौल में भारत के लिए जरूरी है कि वह इन क्षेत्रों में अपनी घरेलू क्षमताओं का विस्तार करे और नई तकनीकों को रक्षा जरूरतों के अनुरूप विकसित करे। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत से अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने की दिशा में मिलकर काम करने का आग्रह किया।

रक्षा अनुसंधान में संस्थानों और उद्योग की साझेदारी पर जोर

राजनाथ सिंह के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में नवाचार को गति देने के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है। IIT जैसे संस्थान नई तकनीकों के विकास, विशेषज्ञ प्रतिभा तैयार करने और अनुसंधान को वास्तविक जरूरतों से जोड़ने में योगदान दे सकते हैं।

सशस्त्र बलों, DRDO, रक्षा उपक्रमों और निजी कंपनियों के संयुक्त प्रयासों से स्वदेशी समाधानों को विकसित करने और उन्हें इस्तेमाल के योग्य बनाने की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। इससे भारत की रक्षा तैयारियों और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।

रक्षा मंत्री का संदेश स्पष्ट है कि बदलते सुरक्षा वातावरण में भारत को अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाना होगा, ताकि देश अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अधिक स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित कर सके।

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