UN मानवाधिकार निकायों पर भारत का रुख, राजनीतिकरण से बचने की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत ने मानवाधिकार निकायों से राजनीतिकरण और दोहरे मापदंडों से बचने की अपील की। भारतीय प्रतिनिधि अनुज स्वरूप ने वन अधिकार अधिनियम से जुड़े दावों के आंकड़े पेश करते हुए UN की रिपोर्ट में भारत के उल्लेख पर सवाल उठाए।

Oct 14, 2026 - 12:08
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UN मानवाधिकार निकायों पर भारत का रुख, राजनीतिकरण से बचने की अपील

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निकायों से आग्रह किया है कि वे अपने कामकाज में राजनीतिक पक्षपात और दोहरे मापदंडों से बचें तथा विभिन्न देशों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों का सम्मान करें। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत का पक्ष रखते हुए प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने कहा कि भारत बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त और उनके कार्यालय के साथ विश्वास, सहयोग और साझेदारी की भावना से काम करता रहेगा। भारत का मानना है कि मानवाधिकार संबंधी संस्थाओं को निष्पक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि वे वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय मार्गदर्शन दे सकें।

दिल्ली में प्रदर्शनों पर UN की टिप्पणी को भारत ने बताया था अनावश्यक

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों की हिरासत से जुड़ी खबरों पर चिंता जताई थी।

इसके जवाब में भारत ने कार्यालय की टिप्पणियों को अनावश्यक बताते हुए उन्हें देश के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप करार दिया था। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के रुख में अंतर सामने आया है।

भारत ने अपने विकास मॉडल और सामाजिक योजनाओं का किया उल्लेख

अनुज स्वरूप ने कहा कि भारत में मानवाधिकारों की अवधारणा बहुलवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की सभ्यतागत परंपराओं पर आधारित है। उन्होंने मानवाधिकार परिषद में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश संवाद और सहयोग के जरिए रचनात्मक योगदान देता रहा है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में भारत में 25 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ 100 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच रहा है।

भारत की ओर से यह भी बताया गया कि करीब 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि लगभग 60 करोड़ लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा सुविधा मिलने का दावा किया गया। इसके अलावा, महिलाओं के लिए 32 करोड़ बैंक खाते खोले जाने का उल्लेख किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इन आंकड़ों को जन-केंद्रित विकास मॉडल का उदाहरण बताया।

UN मानवाधिकार परिषद के लिए 15 नए सदस्य चुने गए

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2027 से 2029 के कार्यकाल के लिए मानवाधिकार परिषद के 15 नए सदस्यों का चुनाव किया। इनमें ब्राजील, बुरुंडी, डोमिनिकन गणराज्य, जर्मनी, घाना, आयरलैंड, जापान, जॉर्डन, कुवैत, नेपाल, नाइजीरिया, मोल्दोवा गणराज्य, यूक्रेन, उरुग्वे और जाम्बिया शामिल हैं।

भारत ने मानवाधिकार परिषद को प्रभावी, निष्पक्ष और विश्वसनीय निकाय बनाने के लिए सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

वन अधिकार अधिनियम पर UN की रिपोर्ट से भारत असहमत

भारत ने मूल निवासियों के अधिकारों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक अल्बर्ट बारूमे की रिपोर्ट में देश के बारे में किए गए उल्लेख पर भी आपत्ति जताई। रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में वन अधिकार अधिनियम के तहत लाखों दावे दाखिल किए गए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में दावे, खासकर सामुदायिक अधिकारों से जुड़े मामले, अब भी लंबित हैं।

इस विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत का पक्ष रखते हुए अनुज स्वरूप ने रिपोर्ट के अनुच्छेद 42 में भारत से संबंधित टिप्पणी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लंबित दावों को लेकर किया गया उल्लेख एक व्यक्ति से मिली जानकारी पर आधारित है और इसके समर्थन में आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, बिना पर्याप्त सत्यापन के ऐसी जानकारी का इस्तेमाल रिपोर्ट की तथ्यात्मक सटीकता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।

भारत ने वन अधिकारों से जुड़े आंकड़े पेश किए

अनुज स्वरूप ने भारत सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत 54 लाख से अधिक दावे दाखिल किए गए हैं। उनके मुताबिक, इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक का निपटारा किया जा चुका है और 25 लाख से अधिक पट्टे वितरित किए गए हैं।

भारत ने विशेष प्रतिवेदक को अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराने की पेशकश भी की, ताकि रिपोर्ट में तथ्यों से जुड़ी संभावित त्रुटियों को सुधारा जा सके।

स्वरूप ने कहा कि भारत ऐसे समावेशी और सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें किसी भी समुदाय को पीछे न छोड़ा जाए। उन्होंने दोहराया कि भारत सभी लोगों के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग जारी रखेगा।

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