निर्मला सीतारमण का सिंगापुर दौरा, निवेश और व्यापार पर होगी अहम चर्चा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सिंगापुर यात्रा में भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, निवेश, डिजिटल वित्त, सेमीकंडक्टर और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। GIC, Temasek और अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी प्रस्तावित हैं।
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 9 से 11 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान वह सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व, प्रमुख निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करेंगी। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करना, निवेश के नए अवसर तलाशना और व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत तय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, उप प्रधानमंत्री गन किम योंग और विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन से मुलाकात करेंगी।
व्यापार, निवेश और सेमीकंडक्टर पर रहेगा फोकस
वित्त मंत्री की बैठकों में भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श होगा। इसमें भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज (ISMR) के तहत लिए गए फैसलों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की जाएगी।
प्रमुख विषयों में व्यापार एवं निवेश, डिजिटल वित्तीय संपर्क, पूंजी बाजार, कराधान, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, कौशल विकास और विमानन क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों के कारोबारी संबंधों और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
भारत में सिंगापुर सबसे बड़ा एफडीआई स्रोत
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा स्रोत है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से भारत में लगभग 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर का कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया।
सिंगापुर के प्रमुख संस्थागत निवेशक GIC और Temasek भी भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर चुके हैं। वित्त मंत्री की इस यात्रा के दौरान निवेश के मौजूदा अवसरों और भविष्य में पूंजी प्रवाह बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।
वैश्विक निवेशकों और वित्तीय संस्थानों से मुलाकात
निर्मला सीतारमण अपनी यात्रा के दौरान सिंगापुर के प्रमुख निवेशकों, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगी। इसके तहत हेज फंड और पोर्टफोलियो फंड प्रबंधकों के साथ एक विशेष राउंडटेबल बैठक तथा कई सरकार-से-व्यवसाय (G2B) बैठकें आयोजित की जाएंगी।
इन चर्चाओं में भारत की आर्थिक विकास यात्रा, निवेश की संभावनाओं और वैश्विक आर्थिक एवं वित्तीय परिस्थितियों में हो रहे बदलावों पर विचार साझा किए जाएंगे।
GIC, Temasek और DBS समेत कई संस्थानों के साथ बैठकें
वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त मंत्री विभिन्न वैश्विक वित्तीय संस्थानों, निवेश कंपनियों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से अलग-अलग बैठकें करेंगी।
इनमें GIC, Temasek, DBS बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII), IHH हेल्थकेयर, मित्सुबिशी UFJ फाइनेंशियल ग्रुप (MUFG), B Capital, HPS Investment Partners, SEB, मित्सुई एंड कंपनी और TPG के प्रतिनिधि शामिल हैं।
इन बैठकों का उद्देश्य निवेशकों के साथ संवाद बढ़ाना, भारतीय बाजार में उपलब्ध अवसरों की जानकारी देना और संभावित कारोबारी साझेदारियों को आगे बढ़ाना है।
NIIF और GIFT City से निवेश बढ़ाने की संभावनाएं
भारत में सिंगापुर की पूंजी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) और GIFT City जैसे मंच महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके माध्यम से निवेशकों को भारत में विभिन्न क्षेत्रों और परियोजनाओं में भागीदारी के अवसर मिल सकते हैं।
वित्त मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर इच्छुक सिंगापुरी निवेशकों को भारतीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और राज्य सरकारों से जोड़ने की दिशा में काम करेगा। संभावित निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा।
भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती
वित्त मंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के मजबूत राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को ठोस कारोबारी परिणामों में बदलने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। व्यापार, निवेश, वित्तीय सेवाओं, तकनीक और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर भारत और सिंगापुर अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
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