ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने उठाया इकोसाइड का मुद्दा, जवाबदेही की मांग

तेहरान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अब्बास अराघची ने युद्ध से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरण बहाली के लिए सहयोग बढ़ाने की मांग की।

Oct 11, 2026 - 17:09
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ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने उठाया इकोसाइड का मुद्दा, जवाबदेही की मांग

तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने युद्ध के दौरान पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए इसके लिए जिम्मेदार देशों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। रविवार को तेहरान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘इकोसाइड: द साइलेंट वॉर क्राइम’ में उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर अमेरिका तथा इजरायल के हमलों से पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हुआ है।

ईरान की समाचार एजेंसी मेहर न्यूज के मुताबिक, अराघची ने कहा कि तेल प्रतिष्ठानों में लगी आग से निकलने वाले हानिकारक पदार्थ हवा, मिट्टी और पानी को प्रदूषित कर सकते हैं। इससे खाद्य श्रृंखला और मानव जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरणीय क्षति पर केवल चिंता व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे रोकने के लिए प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कदम उठाने की जरूरत है।

‘इकोसाइड’ को अंतरराष्ट्रीय अपराध मानने की वकालत

अराघची ने पर्यावरण को पूरी मानवता की साझा विरासत बताते हुए कहा कि इसे सैन्य या आर्थिक हितों के लिए नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ‘इकोसाइड’ यानी पर्यावरण की व्यापक तबाही के प्रभाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं और कई बार संघर्ष समाप्त होने के वर्षों बाद भी पारिस्थितिकी तंत्र इससे उबर नहीं पाता।

उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण जल स्रोतों, मिट्टी, वायु, जंगलों, कृषि भूमि, ऊर्जा संसाधनों और प्राकृतिक आवासों को नुकसान पहुंचता है। इससे जैव विविधता पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

गाजा, लेबनान और ईरान का दिया उदाहरण

सम्मेलन में अराघची ने गाजा और लेबनान में पर्यावरण को हुए नुकसान का भी उल्लेख किया। उन्होंने गाजा में जैतून के बागों के विनाश तथा पानी और मिट्टी के प्रदूषण की बात कही। वहीं, लेबनान में आग की घटनाओं से जंगलों और जैतून के पेड़ों को हुए नुकसान की ओर ध्यान दिलाया।

ईरान का जिक्र करते हुए उन्होंने मार्च 2026 में तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों के बाद वातावरण में खतरनाक रासायनिक पदार्थ फैलने का दावा किया। उन्होंने तेहरान में कथित ‘काली बारिश’ की घटनाओं का भी उल्लेख किया। इन दावों और पर्यावरणीय प्रभावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से की जानी आवश्यक है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए तीन प्रस्ताव

अराघची ने पर्यावरणीय नुकसान से निपटने के लिए तीन प्रमुख कदमों पर जोर दिया। पहला, गंभीर पर्यावरणीय क्षति की पहचान और जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय मानक तथा मजबूत कानूनी व्यवस्था विकसित की जाए।

दूसरा, सशस्त्र संघर्षों के दौरान पर्यावरण को होने वाले नुकसान का वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से दस्तावेजीकरण किया जाए, ताकि उसके प्रभावों का आकलन किया जा सके। तीसरा, प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरण की बहाली, पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्निर्माण और प्रभावित देशों की सहायता के लिए क्षेत्रीय एवं वैश्विक सहयोग बढ़ाया जाए।

अराघची ने कहा कि ईरान ‘इकोसाइड’ को एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में मान्यता दिए जाने का समर्थन करता है। उन्होंने इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए ईरान के वैज्ञानिक, कानूनी और कूटनीतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने की तत्परता भी जताई।

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