EAS बैठक में भारत का ऊर्जा रोडमैप, आसियान पावर ग्रिड और क्षेत्रीय बिजली व्यापार पर जोर
केंद्रीय मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने मनीला में 20वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने आसियान पावर ग्रिड, क्षेत्रीय बिजली व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और प्रस्तावित भारत-सिंगापुर विद्युत संपर्क में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने मनीला में आयोजित 20वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) की ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बैठक में उन्होंने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार और देशों के बीच बिजली संपर्क मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता सामने रखी।
श्रीपद नाइक ने भारत की एक्ट ईस्ट नीति और आसियान के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए ऊर्जा सहयोग के लिए आसियान कार्य योजना 2026-2030 का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय ऊर्जा नेटवर्क, बिजली के व्यापार और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में सहयोग से सदस्य देशों को लाभ मिल सकता है।
आसियान पावर ग्रिड को मजबूत करने पर भारत का जोर
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने आसियान पावर ग्रिड, क्षेत्रीय बिजली पारेषण और बहुपक्षीय विद्युत व्यापार को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत क्षेत्रीय ऊर्जा संपर्क बढ़ाने के साथ तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण में योगदान देने के लिए तैयार है।
नाइक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2025 में 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान की गई घोषणा का उल्लेख किया। इस घोषणा के तहत ग्रिड कनेक्टिविटी के क्षेत्र में 400 पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के माध्यम से आसियान पावर ग्रिड पहल को समर्थन देने की बात कही गई थी।
भारत की स्थापित बिजली क्षमता 558.8 गीगावाट
केंद्रीय मंत्री ने भारत के विद्युत क्षेत्र में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि 30 सितंबर 2026 तक देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 558.8 गीगावाट थी। उनके अनुसार, इसमें गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 308 गीगावाट यानी लगभग 55 प्रतिशत रही।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने जून 2025 में ही गैर-जीवाश्म स्रोतों से कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल कर लिया था। यह उपलब्धि देश के 2030 के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य से पांच वर्ष पहले प्राप्त हुई।
रूफटॉप सौर ऊर्जा और स्वच्छ बिजली पर फोकस
श्रीपद नाइक ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का भी उल्लेख किया और रूफटॉप सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने और उपभोक्ताओं को स्वच्छ विकल्प उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
भारत ने बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली ग्रिड एकीकरण, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अपना अनुभव साझा करने की इच्छा जताई।
भारत-सिंगापुर बिजली संपर्क की संभावनाओं पर चर्चा
क्षेत्रीय बिजली संपर्क के विषय पर मंत्री ने भारत और सिंगापुर के बीच प्रस्तावित 2,000 मेगावाट के सीमा-पार विद्युत संपर्क विकल्पों का उल्लेख किया। दिए गए विवरण के अनुसार, संभावित योजना में लगभग 3,000 किलोमीटर लंबा भूमि-आधारित पारेषण गलियारा शामिल है, जो भारत के इम्फाल को म्यांमार, थाईलैंड और मलेशिया के रास्ते सिंगापुर से जोड़ सकता है।
इस तरह की परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले तकनीकी व्यवहार्यता, संबंधित देशों की सहमति और नियामकीय व्यवस्था जैसे पहलुओं का मूल्यांकन जरूरी होगा। क्षेत्रीय बिजली संपर्क से बिजली व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा के एकीकरण और आपूर्ति सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।
ऊर्जा सुरक्षा और नई तकनीकों में सहयोग की पेशकश
बैठक में भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, आपातकालीन तैयारी, एलएनजी और गैस आपूर्ति सुरक्षा, बिजली प्रणालियों की मजबूती तथा नवीकरणीय ऊर्जा के पूर्वानुमान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी सामने रखीं।
नाइक ने बैटरी ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर ज्ञान साझा करने की इच्छा जताई। उन्होंने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजनाओं में भी सहयोग की बात कही।
इसके साथ ही उन्होंने NTPC, POWERGRID, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE), राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) और राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (NPTI) जैसे भारतीय संस्थानों तथा आसियान ऊर्जा केंद्र के बीच संबंध मजबूत करने पर जोर दिया।
भारत ने आसियान पावर ग्रिड से जुड़े समझौता ज्ञापन को लागू करने और बहुपक्षीय बिजली व्यापार बढ़ाने के प्रयासों का समर्थन किया। बैठक में भारत का प्रमुख संदेश रहा कि क्षेत्रीय साझेदारी के जरिए सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
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