FSSAI Analogue Paneer Ban: एनालॉग पनीर पर देशभर में सख्ती की तैयारी, ‘पनीर’ नाम पर लग सकती है रोक
FSSAI ने दूध से प्राप्त सामग्री से नहीं बने एनालॉग उत्पादों को ‘पनीर’ के नाम से बनाने, बेचने और मार्केटिंग करने पर रोक के लिए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। प्रस्ताव पर 60 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
देश में पनीर के नाम पर गैर-डेयरी उत्पादों की बिक्री को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। खाद्य नियामक ने ‘एनालॉग इन डेयरी कॉन्टेक्स्ट’ श्रेणी के उत्पादों को पनीर के नाम से बनाने और बेचने पर रोक लगाने के लिए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और संरचना को लेकर भ्रमित होने से बचाना है।
‘पनीर’ नाम का इस्तेमाल करना होगा बंद
FSSAI के प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे उत्पाद जो दूध से प्राप्त सामग्री के बजाय वनस्पति तेल या अन्य गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किए जाते हैं, उन्हें अपने नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
नियामक का कहना है कि उत्पाद की सही पहचान स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि उपभोक्ता उसे असली डेयरी पनीर समझकर खरीदने के लिए भ्रमित न हों।
अभी अंतिम फैसला नहीं
FSSAI की ओर से जारी बदलाव फिलहाल ड्राफ्ट के स्तर पर हैं। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार प्रस्ताव पर जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। अधिसूचना के प्रकाशित होने के बाद 60 दिनों की अवधि पूरी होने पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार किया जाएगा।
इसलिए फिलहाल इसे देशभर में एनालॉग पनीर पर लागू अंतिम प्रतिबंध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
पहले भी कार्रवाई कर चुका है FSSAI
एनालॉग डेयरी उत्पादों की गलत लेबलिंग को लेकर FSSAI पहले भी कार्रवाई कर चुका है। अप्रैल 2026 में FSSAI के पश्चिमी क्षेत्र ने स्पष्ट किया था कि cheese analogue को ‘paneer’ के नाम से बेचना नियमों का उल्लंघन है। खाद्य कारोबारियों और फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को ऐसे उत्पादों की सही पहचान और लेबलिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
राज्यों में भी उठे कदम
एनालॉग पनीर को लेकर कुछ राज्यों में भी कार्रवाई की गई है। महाराष्ट्र और गुजरात में गैर-डेयरी सामग्री से बने ऐसे उत्पादों के उत्पादन और बिक्री को लेकर नियामकीय कदम उठाए गए हैं।
FSSAI का नया ड्राफ्ट प्रस्ताव इसी व्यापक चिंता से जुड़ा है कि गैर-डेयरी उत्पादों को असली डेयरी उत्पाद के नाम से बेचने पर उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता और संरचना के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाती।
उपभोक्ताओं को मिलेगी स्पष्ट जानकारी
प्रस्तावित बदलाव का मुख्य उद्देश्य खाद्य उत्पादों की लेबलिंग को अधिक स्पष्ट बनाना और उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना है। यदि ड्राफ्ट में प्रस्तावित बदलाव अंतिम रूप से लागू होते हैं, तो डेयरी एनालॉग उत्पादों के नाम और प्रचार में ‘पनीर’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर नियम और सख्त हो सकते हैं।
FSSAI की आधिकारिक अधिसूचना में इसे उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति और बनावट के संबंध में गुमराह होने से बचाने की दिशा में प्रस्तावित बदलाव बताया गया है।
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