मनसुख मांडविया ने लॉन्च की NDTL की नई रिसर्च ग्रांट पॉलिसी

नई दिल्ली में WAADS की 10वीं बैठक के दौरान मनसुख मांडविया ने NDTL की नई रिसर्च ग्रांट पॉलिसी और न्यूजलेटर लॉन्च किया। उन्होंने डोपिंग के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति और खिलाड़ी जागरूकता पर जोर दिया।

Nov 04, 2026 - 09:23
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मनसुख मांडविया ने लॉन्च की NDTL की नई रिसर्च ग्रांट पॉलिसी

केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को नई दिल्ली में नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी (NDTL) की ‘एक्स्ट्रा-म्यूरल रिसर्च ग्रांट पॉलिसी’ लॉन्च की। इसका उद्देश्य डोपिंग की पहचान, रोकथाम और एंटी-डोपिंग से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

यह घोषणा वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ एंटी-डोपिंग साइंटिस्ट्स (WAADS) की 10वीं क्वालिटी एश्योरेंस मैनेजर मीटिंग 2026 के दौरान की गई। 2 नवंबर से शुरू हुई दो दिवसीय बैठक का आयोजन NDTL ने किया था। इसमें खेल और विज्ञान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों तथा हितधारकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मांडविया ने NDTL के न्यूजलेटर का भी शुभारंभ किया।

डोपिंग के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति

बैठक को संबोधित करते हुए मांडविया ने डोपिंग के मामलों में भारत की शून्य सहनशीलता नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि खेलों में हर जीत खिलाड़ी की प्रतिभा, अनुशासन और मेहनत के आधार पर होनी चाहिए।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों के दौरान खेलों को राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में पहचान मिली है। उनके मुताबिक, भारत की खेल यात्रा अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है और इसमें निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

एंटी-डोपिंग अनुसंधान को मिलेगा प्रोत्साहन

मांडविया ने बताया कि नई एक्स्ट्रा-म्यूरल रिसर्च ग्रांट पॉलिसी के जरिए डोपिंग का पता लगाने और उसे रोकने से जुड़े उन्नत क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।

इस पहल से एंटी-डोपिंग के क्षेत्र में देश की वैज्ञानिक क्षमता और शोध के आधार को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका मकसद शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक संस्थानों को इस क्षेत्र में नए समाधान विकसित करने के अवसर देना है।

खिलाड़ी शिक्षा और जागरूकता पर भी जोर

खेल मंत्री ने कहा कि एंटी-डोपिंग व्यवस्था केवल परीक्षण तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके साथ खिलाड़ियों को शिक्षित करना, जागरूकता बढ़ाना और प्रतिबंधित पदार्थों के इस्तेमाल को रोकना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों, कोचों और चिकित्सा विशेषज्ञों को प्रतिबंधित पदार्थों के दुष्प्रभाव, सप्लीमेंट्स से जुड़े जोखिम और एंटी-डोपिंग नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारियों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

मांडविया के मुताबिक, भारत राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य भी रखता है। ऐसे में एंटी-डोपिंग परीक्षणों की गुणवत्ता, खिलाड़ी शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग देश की खेल प्राथमिकताओं का अहम हिस्सा हैं।

खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसी पहलों का जिक्र

मंत्री ने खेलो इंडिया, फिट इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और युवाओं को प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर देने में योगदान दिया है।

उन्होंने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। वहीं, एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड 114 पदक जीतकर देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया।

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