एशियन पैरा गेम्स 2026: दिलीप गावित ने जीता दूसरा गोल्ड मेडल

भारतीय पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में 48.27 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। भाविककुमार भरवाड़ ने रजत और जापान के काकेरु इशिदा ने कांस्य पदक हासिल किया। गावित इससे पहले 100 मीटर टी47 में भी गोल्ड जीत चुके हैं।

Oct 22, 2026 - 19:23
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एशियन पैरा गेम्स 2026: दिलीप गावित ने जीता दूसरा गोल्ड मेडल

एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अपना दूसरा गोल्ड हासिल किया। भाविककुमार भरवाड़ ने रजत पदक अपने नाम किया, जबकि जापान के काकेरु इशिदा को कांस्य मिला। इससे पहले गावित 100 मीटर टी47 स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।

48.27 सेकंड में दौड़ पूरी कर जीता गोल्ड

नागोया सिटी के मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित फाइनल में गावित ने 48.27 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। भाविककुमार भरवाड़ ने 49.31 सेकंड में दौड़ पूरी कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। जापान के काकेरु इशिदा 49.58 सेकंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

रिपोर्ट के अनुसार, गावित का यह स्वर्ण पदक एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का 20वां गोल्ड रहा। उनके प्रदर्शन से भारतीय दल के पदक अभियान को एक और सफलता मिली।

100 मीटर में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं गावित

400 मीटर से पहले गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में 10.69 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था। इसी स्पर्धा में बेसिल ने 10.72 सेकंड के साथ रजत पदक हासिल किया और गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया।

गावित इससे पहले 2022 के एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की 400 मीटर टी47 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। उन्होंने पेरिस पैरालंपिक 2024 में भी 400 मीटर टी47 के फाइनल तक पहुंचकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था।

संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का सफर

महाराष्ट्र के नासिक के पास स्थित तोरण डोंगारी गांव में जन्मे गावित किसान परिवार से आते हैं। बचपन में करीब पांच से छह वर्ष की उम्र में पेड़ से गिरने के कारण उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लगी थी। समय पर इलाज नहीं मिलने के चलते चोट में गैंग्रीन हो गया और अंततः उनकी कोहनी के नीचे से हाथ काटना पड़ा।

इस कठिन परिस्थिति के बावजूद गावित ने खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने गांव की सड़कों पर दौड़ने का अभ्यास किया और धीरे-धीरे पैरा-एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाई।

कोच वैजनाथ काले ने पहचानी प्रतिभा

गावित की प्रतिभा को कोच वैजनाथ काले ने पहचाना और उन्हें पेशेवर पैरा-एथलेटिक्स की दिशा में आगे बढ़ने में मदद की। लगातार अभ्यास और मेहनत के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी जगह बनाई।

एशियन पैरा गेम्स 2026 में दो स्वर्ण पदक जीतना गावित के करियर की एक अहम उपलब्धि है। उनका सफर दिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और निरंतर अभ्यास से खेल में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

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