टाइगर ट्रायम्फ 2026: भारत-अमेरिका सैन्य अभ्यास शुरू, पहली बार शामिल होगी NDRF
भारत और अमेरिका के बीच पांचवें द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ 2026 का उद्घाटन 2 नवंबर को विशाखापत्तनम में हुआ। इस बार अभ्यास टेबलटॉप एक्सरसाइज के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें दोनों देशों की थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रतिनिधियों के साथ पहली बार NDRF की टीम भी भाग ले रही है।
भारत और अमेरिका के बीच पांचवें द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभ्यास ‘टाइगर ट्रायम्फ 2026’ का आगाज हो गया है। इसका उद्घाटन समारोह 2 नवंबर को विशाखापत्तनम के मैरीटाइम वारफेयर सेंटर में आयोजित किया गया। इस अभ्यास में दोनों देशों की सेनाएं आपदा के समय राहत कार्यों की संयुक्त योजना और समन्वय पर काम करेंगी।
इस बार ‘टाइगर ट्रायम्फ’ को टेबलटॉप एक्सरसाइज (TTX) के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बड़े स्तर पर मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के दौरान भारतीय और अमेरिकी सशस्त्र बलों के बीच तालमेल, योजना बनाने की क्षमता और संयुक्त रूप से काम करने की दक्षता को बेहतर करना है।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने किया उद्घाटन
अभ्यास के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल विशाल बिश्नोई और अमेरिकी प्रशांत बेड़े के वाइस कमांडर रियर एडमिरल जोकिन जे. मार्टिनेज डी पिनिलोस ने की।
यह अभ्यास दोनों देशों के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों और समुद्री रणनीतिक सहयोग को भी दर्शाता है। इसके मौजूदा संस्करण में बड़े आपदा राहत अभियानों की योजना बनाने के साथ संयुक्त बहु-क्षेत्रीय अभियानों यानी कंबाइंड ज्वाइंट ऑल-डोमेन ऑपरेशंस की क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत की तीनों सेनाओं के जवान लेंगे हिस्सा
भारतीय दल में नौसेना के समुद्री अभियानों से जुड़े विशेषज्ञों के अलावा थल सेना के जवान और वायु सेना की विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हैं। तीनों सेनाओं के विशेष बलों के सदस्य भी इस अभ्यास का हिस्सा होंगे।
इस बार राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम भी पहली बार टाइगर ट्रायम्फ के पांचवें संस्करण में भाग लेगी। इससे सैन्य बलों और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी सैन्य बलों के विशेषज्ञ भी होंगे शामिल
अमेरिका की ओर से वायु सेना, थल सेना, मरीन कॉर्प्स और नौसेना के विशेषज्ञ प्रतिनिधि अभ्यास में हिस्सा लेंगे। इसके अतिरिक्त अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा सेवाओं और विस्फोटक आयुध निष्कासन (EOD) से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
दोनों देशों के सैन्य और आपदा राहत विशेषज्ञ इस अभ्यास के माध्यम से बड़े संकटों के दौरान संयुक्त कार्रवाई, संसाधनों के उपयोग और राहत अभियानों के संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे।
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