ईरान-अमेरिका समझौते पर संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर सीमित रक्षात्मक हमले किए। वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ ने कहा कि अब समझौते की दिशा में अगला कदम अमेरिका को उठाना है। इस बीच, कतर के मध्यस्थों और सऊदी अरब के साथ भी कूटनीतिक बातचीत जारी है।
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि कूटनीतिक बातचीत तेज होने के बावजूद किसी ठोस सहमति तक पहुंचना आसान नहीं दिख रहा है। इस बीच, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद क्षेत्र में फिर से बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका को रोकने के लिए मध्यस्थ बातचीत में जुटे हैं।
अमेरिका ने क़ेश्म द्वीप पर किए सीमित हमले
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने सोमवार रात ईरान के क़ेश्म द्वीप पर सीमित और रक्षात्मक हवाई हमले किए। एक अधिकारी ने बताया कि इन हमलों में उन सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों को निशाना बनाया गया, जिनसे अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को खतरा था। अमेरिकी पक्ष ने इन कार्रवाइयों को बड़े पैमाने पर युद्ध दोबारा शुरू करने का संकेत नहीं बताया है।
दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कतर के मध्यस्थों के जरिए जारी है बातचीत
ईरानी अधिकारी के अनुसार, कतर के मध्यस्थ तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मतभेद कम करने की कोशिश कर रहे हैं। कतर के प्रतिनिधि सोमवार रात तेहरान पहुंचे थे। बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के मसौदे पर चर्चा की जा रही है।
ईरानी पक्ष का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका को तेहरान की शर्तों पर विचार करना होगा। अधिकारी ने संकेत दिया कि इसके बाद ही परमाणु मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका की उन मांगों को स्वीकार नहीं करेगा, जिन्हें वह अत्यधिक मानता है।
कलीबाफ बोले- अब गेंद अमेरिका के पाले में
ईरान की संसद के अध्यक्ष और बातचीत में शामिल प्रमुख नेता मोहम्मद बाकिर कलीबाफ ने मंगलवार को कहा कि तेहरान ने अमेरिका को अपना मजबूत और तार्किक जवाब दे दिया है। अब यह वॉशिंगटन पर निर्भर करता है कि वह तनाव कम करने के लिए क्या कदम उठाता है।
कलीबाफ ने चेतावनी दी कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि धमकियों और हमलों के जरिए ईरानी जनता को झुकाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उनके मुताबिक, अमेरिका की किसी नई गलती पर ईरान की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित हो सकती है और उसका दायरा क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा।
ट्रंप ने समझौते की संभावना से नहीं किया इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ समझौते की संभावना पर बात की। उन्होंने संकेत दिया कि तेहरान जल्द से जल्द समझौता करना चाहता है। हालांकि, मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा बड़े सैन्य हमले किए जाने की आशंका को लेकर उन्होंने स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी बातचीत में कुछ प्रगति होने की बात कही है। इसके बावजूद दोनों पक्षों के सार्वजनिक बयानों से साफ है कि समझौते तक पहुंचने के लिए कई अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
सऊदी अरब के साथ भी बातचीत कर रहा ईरान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को कहा कि सऊदी अरब के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि तेहरान क्षेत्रीय देशों के बीच ऐसी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसमें बाहरी सैन्य हस्तक्षेप की भूमिका न हो।
पिछले सप्ताह सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों ने तेहरान में ईरानी नेतृत्व से मुलाकात की थी। अगस्त के बाद इन देशों के अधिकारियों का ईरान के साथ यह पहला उच्चस्तरीय संपर्क था। सऊदी अरब ने इस यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र में सैन्य तनाव दोबारा बढ़ने से रोकने के लिए बातचीत के रास्ते खोलना बताया था।
यमन में हूतियों की गतिविधियों से बढ़ी चिंता
क्षेत्रीय तनाव का असर यमन और सऊदी अरब तक भी पहुंच रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच हाल के सप्ताहों में संघर्ष तेज हुआ है। हूतियों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, हूती हमलों में सऊदी अरब के तेल ठिकानों और रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित अन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया है। इन घटनाओं से उड़ानों और तेल निर्यात पर असर पड़ा है। जवाब में सऊदी अरब ने यमन में हवाई हमले किए हैं।
यमन वर्ष 2014 से गृहयुद्ध का सामना कर रहा है। उस समय हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त और सऊदी समर्थित सरकार को राजधानी सना से बाहर कर दिया था। मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष ने इस पुराने संकट को और जटिल बना दिया है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)