राजनाथ सिंह का सेना के आधुनिकीकरण पर जोर, रक्षा बजट बढ़कर ₹7.85 लाख करोड़
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, आधुनिक तकनीक, निजी क्षेत्र की भागीदारी और रणनीतिक स्वायत्तता को जरूरी बताया। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट ₹7.85 लाख करोड़ किया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार, 3 नवंबर को राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य विषय भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण रहा। इस दौरान उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात और युद्ध के नए तरीकों को देखते हुए सेना को आधुनिक तकनीक और उन्नत हथियार प्रणालियों से लैस करना जरूरी है।
बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, तीनों सेनाओं के उप-प्रमुख, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हुए। उपस्थित सांसदों में तरुण चुघ, संदीप पाठक, पवन खेड़ा, तिरुचि शिवा, सुदीप बंद्योपाध्याय, सौगत रॉय और नवीन जिंदल के नाम शामिल रहे।
बदलते युद्ध के स्वरूप पर चर्चा
राजनाथ सिंह ने कहा कि ड्रोन, मिसाइल और वायु रक्षा प्रणालियों की भूमिका आधुनिक युद्ध में लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सशस्त्र बलों को मौजूदा और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। बैठक में उभरते सुरक्षा खतरों, युद्ध के बदलते स्वरूप और तकनीकी प्रगति के साथ सेना की परिचालन क्षमता मजबूत करने पर चर्चा हुई।
रक्षा बजट में बढ़ोतरी, आधुनिकीकरण के लिए ₹2.19 लाख करोड़
रक्षा मंत्री ने आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय संसाधनों को अहम बताते हुए कहा कि सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इसमें 2.19 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए हैं, जिसका इस्तेमाल आधुनिक उपकरणों और सैन्य क्षमताओं की खरीद में किया जाएगा।
उन्होंने रक्षा उत्पादन में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं, इसी अवधि में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये रहा। सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
तकनीक और निजी कंपनियों की भागीदारी पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक की भूमिका निर्णायक हो गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) नई तकनीकों, हथियारों और मिसाइल प्रणालियों पर काम कर रहा है। साथ ही, रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) से लेकर बड़ी कंपनियों तक को रक्षा उत्पादन में अवसर दिए जा रहे हैं, ताकि देश की घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत हो सके।
मानव संसाधन और सैन्य ढांचे में बदलाव
रक्षा मंत्री ने मानव संसाधन को सशस्त्र बलों की प्रमुख ताकत बताया। उनके मुताबिक, तीनों सेनाएं आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप अपने संगठनात्मक ढांचे में सुधार कर रही हैं। उन्होंने भारतीय सेना की नई संरचनाओं और इकाइयों का जिक्र करते हुए ‘असनी’, ‘भैरव’ और ‘शक्तिबाण’ जैसी पहल को मौजूदा सैन्य जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी क्षमता पर फोकस
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि सेना का आधुनिकीकरण केवल नए हथियार और उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य युद्ध के लिए तैयारी मजबूत करना, आधुनिक तकनीक अपनाना और देश के भीतर ऐसी क्षमताएं विकसित करना है जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके।
उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीक के विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। रक्षा मंत्री के अनुसार, सरकार ऐसा मजबूत रक्षा इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है जिसमें भारतीय उद्योगों की भागीदारी बढ़े, देश में ही उन्नत तकनीक विकसित हो और रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हो।
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