सरदार पटेल की 151वीं जयंती: राष्ट्रपति मुर्मु ने पटेल चौक पर दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रीय एकता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समेत कई नेताओं ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जानें देश की 500 से अधिक रियासतों के एकीकरण में लौह पुरुष का योगदान और राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व।
नई दिल्ली: सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के पटेल चौक पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई गणमान्य लोगों ने भी देश के पहले उप-प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।
पटेल चौक पर जुटे कई प्रमुख नेता
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज भी मौजूद रहीं। सभी नेताओं ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। पटेल चौक का नाम देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में रखा गया है। नई दिल्ली का यह इलाका कई प्रमुख सरकारी कार्यालयों, मंत्रालयों और संस्थानों के निकट स्थित है।
31 अक्टूबर 1875 को हुआ था जन्म
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। पेशे से वकील रहे पटेल स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। आजादी के बाद उन्होंने देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। देश की एकता और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
2014 से राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है जयंती
केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। इस दिवस का उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना है। हर साल इस मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
‘रन फॉर यूनिटी’ और एकता मार्च का आयोजन
राष्ट्रीय एकता दिवस पर ‘रन फॉर यूनिटी’ और एकता मार्च जैसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को एकजुटता का संदेश दिया जाता है। इस वर्ष एकता नगर में शाम को ‘रन फॉर यूनिटी’ आयोजित की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बनासकांठा में एक कार्यक्रम के दौरान युवाओं से इसमें बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की थी।
500 से अधिक रियासतों के एकीकरण में निभाई अहम भूमिका
आजादी के बाद देश की 500 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने के प्रयासों में सरदार पटेल ने निर्णायक भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व और योगदान के कारण उन्हें ‘लौह पुरुष’ तथा भारत के एकीकरणकर्ता के रूप में याद किया जाता है। 15 दिसंबर 1950 को उनका निधन हुआ था, लेकिन राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए उनके प्रयास आज भी देश के इतिहास का अहम हिस्सा हैं।
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