विकसित भारत 2047 के लिए बैंकिंग सुधार, सरकार ने बनाई उच्च स्तरीय समिति
केंद्र सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा के लिए ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ गठित की है। सुरेश एन. पटेल की अध्यक्षता वाली समिति नियामक सुधार, बैंकों की पूंजी जरूरतों, डिजिटल नवाचार, एआई, साइबर सुरक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे मुद्दों पर सुझाव देगी।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा और उसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ बैंकिंग व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, वित्तीय रूप से समावेशी और मजबूत बनाने के लिए संरचनात्मक, संस्थागत, नियामक तथा कानूनी सुधारों की सिफारिश करेगी।
सुरेश एन. पटेल को बनाया गया समिति का अध्यक्ष
पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त सुरेश एन. पटेल को समिति की अध्यक्षता सौंपी गई है। इसके सदस्यों में भारतीय रिजर्व बैंक के उप-गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू, इंडियन बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद्मजा चुंदरू और आरबीआई के पूर्व उप-गवर्नर एन. एस. विश्वनाथन शामिल हैं।
वित्तीय सेवा विभाग में बैंकिंग का कामकाज देखने वाले संयुक्त सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
बजट 2026-27 में हुई थी समिति के गठन की घोषणा
केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में इस समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को देश की दीर्घकालिक आर्थिक विकास योजनाओं, वित्तीय समावेशन और विकसित भारत के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करना है।
मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था और वैश्विक मानकों का होगा आकलन
समिति देश में प्रचलित बैंकिंग प्रक्रियाओं और विवेकपूर्ण नियामकीय मानदंडों की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही बेहतर बैंकिंग व्यवस्थाओं की पहचान की जाएगी। इन प्रथाओं को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने और देश के बैंकों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का रोडमैप भी सुझाया जाएगा।
नियामक और कानूनी व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश
बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े मौजूदा नियामक और विधायी ढांचे की भी समीक्षा की जाएगी। इस दायरे में वाणिज्यिक बैंकों के साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक भी शामिल होंगे। समिति का जोर बैंकिंग व्यवस्था में कार्यक्षमता बढ़ाने और कारोबार करना आसान बनाने वाले सुधारों की पहचान पर रहेगा।
बैंकों की पूंजी जरूरतों और वित्तपोषण के स्रोतों का आकलन
समिति बैंकों की दीर्घकालिक पूंजी आवश्यकताओं का आकलन करेगी। इसमें विकास वित्तीय संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा। साख वृद्धि को समर्थन देने के लिए वित्तपोषण के नए स्रोतों और उपयुक्त तंत्र पर भी सुझाव दिए जाएंगे।
इसके अलावा कारोबारों के लिए पूंजी की लागत में मौजूद अंतर का अध्ययन किया जाएगा। सतत आर्थिक विकास को गति देने के लिए निजी निवेश बढ़ाने से जुड़े नीतिगत विकल्पों की भी सिफारिश की जाएगी।
एआई और डिजिटल बैंकिंग के लिए तैयार होगा रोडमैप
बैंकिंग संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल नवाचार के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए समिति रणनीति तैयार करेगी। इसके साथ ही साइबर जोखिमों से निपटने और डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
बैंकिंग क्षेत्र की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कुशल कार्यबल तैयार करने, प्रतिभाओं को आकर्षित करने और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी सुझाव दिए जाएंगे।
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और लीड बैंक योजना की समीक्षा
समिति प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) ढांचे और लीड बैंक योजना की प्रभावशीलता का भी आकलन करेगी। इसका उद्देश्य बदलती आर्थिक जरूरतों और वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों के अनुरूप संतुलित तथा आंकड़ों पर आधारित ऋण वितरण व्यवस्था को मजबूत करना है।
इन योजनाओं की प्रासंगिकता, कार्यक्षमता और विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय की भी समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर सौंपे जाने वाले अन्य विषयों पर भी समिति अपनी सिफारिशें देगी।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर बैंकिंग क्षेत्र में ऐसे सुधारों की दिशा तय करने में मदद मिलेगी, जिनसे भारतीय बैंकिंग प्रणाली को अधिक आधुनिक, मजबूत, समावेशी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुकूल बनाया जा सके।
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