गांधी जयंती पर राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि, शास्त्री जी को भी किया नमन

महात्मा गांधी की 157वीं और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति ने गांधीजी के शांति और अहिंसा के संदेश को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बेहद प्रासंगिक बताया।

Oct 02, 2026 - 11:42
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गांधी जयंती पर राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि, शास्त्री जी को भी किया नमन
गांधी जयंती पर राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि, शास्त्री जी को भी किया नमन

महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को देश ने दोनों महान नेताओं को श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में गांधीजी और शास्त्री जी के समाधि स्थलों पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में महात्मा गांधी के जीवन और आदर्शों को याद किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष और युद्ध की परिस्थितियों के बीच गांधीजी का शांति और अहिंसा का संदेश आज और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। राष्ट्रपति सचिवालय ने भी उनके इस संदेश को आधिकारिक रूप से जारी किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस विकास यात्रा में संवेदनशीलता और समावेशिता को महत्व दिया जाना जरूरी है, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ के विचार से जोड़ते हुए नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। वहीं उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी राजघाट पर बापू को नमन किया। इस दौरान गांधीजी के सत्य, अहिंसा, शांति, न्याय और मानव गरिमा से जुड़े विचारों को याद किया गया।

इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर विजय घाट में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शास्त्री जी को उनकी सादगी, ईमानदारी, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रसेवा के लिए याद किया गया।

लाल बहादुर शास्त्री ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कठिन दौर में देश का नेतृत्व किया था। वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और खाद्य संकट के दौर में उनके नेतृत्व ने देशवासियों में आत्मविश्वास पैदा किया। उनका प्रसिद्ध ‘जय जवान, जय किसान’ संदेश आज भी भारतीय सैनिकों और किसानों के योगदान की याद दिलाता है।

गांधीजी और शास्त्री जी दोनों का जन्म 2 अक्टूबर को हुआ था। इस वजह से हर वर्ष 2 अक्टूबर को देश में एक साथ गांधी जयंती और शास्त्री जयंती मनाई जाती है। दोनों नेताओं के जीवन और विचारों को देश की सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रसेवा की परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

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