गुजरात की अनोखी नवरात्रि परंपराएं: आग वाली इंधोनी रास और स्वास्तिक गरबा
गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया के अलावा कई अनूठी लोकपरंपराएं भी देखने को मिलती हैं। राजकोट में 19 साल पुरानी इंधोनी रास और जामनगर में 52 साल से आयोजित गरबी परंपरा आस्था, साहस और संस्कृति का अनोखा संगम प्रस्तुत करती हैं।
गुजरात में नवरात्रि का पर्व गरबा और डांडिया के साथ-साथ अपनी अनूठी लोकपरंपराओं के लिए भी जाना जाता है। राजकोट और जामनगर में होने वाली पारंपरिक रास प्रस्तुतियां आस्था, साहस और सांस्कृतिक विरासत का खास उदाहरण हैं। कहीं कलाकार सिर पर जलती हुई इंधोनी और गरबे के घड़े रखकर नृत्य करते हैं, तो कहीं धधकते अंगारों के बीच स्वास्तिक की आकृति बनाकर गरबा प्रस्तुत किया जाता है।
इन परंपराओं के जरिए स्थानीय समुदाय मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं।
राजकोट में 19 साल से निभाई जा रही आग वाली इंधोनी रास की परंपरा
राजकोट के मावड़ी चौक में नवरात्रि के दौरान श्री बजरंग गरबी मंडल की ओर से विशेष ‘इंधोनी रास’ का आयोजन किया जाता है। आयोजकों के अनुसार, यह परंपरा पिछले 19 वर्षों से जारी है।
इस प्रस्तुति में कलाकार सिर पर जलती हुई इंधोनी और गरबे के घड़े रखते हैं। उनके हाथों में जलती हुई मशालें भी होती हैं और वे लगभग 20 मिनट तक लगातार लयबद्ध गरबा करते हैं। आग के बीच संतुलन बनाए रखना और नृत्य की लय को बरकरार रखना इस प्रस्तुति की सबसे बड़ी चुनौती होती है।
इस रास में भाग लेने वाली एक युवती के मुताबिक, इसकी तैयारी के लिए दो महीने से अधिक समय तक अभ्यास करना पड़ता है। उसने बताया कि परिवार को इस परंपरा में उसकी भागीदारी पर गर्व है और प्रस्तुति के दौरान उसे ऐसा महसूस होता है, मानो नवदुर्गा स्वयं उनके साथ नृत्य कर रही हों।
जामनगर का स्वास्तिक अंगारा रास है खास पहचान
जामनगर में श्री रंडाल अंबिका कुमारिका गरबी मंडल की ओर से आयोजित गरबा भी अपनी विशिष्ट शैली के लिए जाना जाता है। आयोजकों के अनुसार, इस मंडल में पिछले 52 वर्षों से गरबी का आयोजन किया जा रहा है।
यहां का ‘स्वास्तिक अंगारा रास’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकार जलती हुई लकड़ियों और अंगारों के बीच स्वास्तिक की आकृति बनाते हुए रास प्रस्तुत करते हैं। इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। कई दर्शक आसपास की ऊंची जगहों से भी इस प्रस्तुति को देखते हैं।
इस परंपरा में विदेश से आने वाले दर्शक भी रुचि दिखाते हैं। आयोजक सुरेश गोंडालिया के अनुसार, स्वास्तिक रास के अलावा मशाल रास, सड़क तीन-तन्नी रास और डाकला रास जैसी प्रस्तुतियां भी नवरात्रि उत्सव का हिस्सा हैं।
आस्था और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम
राजकोट की इंधोनी रास और जामनगर की स्वास्तिक अंगारा रास गुजरात की लोकसंस्कृति की विविधता को दर्शाती हैं। इन आयोजनों में पारंपरिक संगीत, सामूहिक भागीदारी और धार्मिक आस्था का मेल दिखाई देता है।
नवरात्रि के दौरान होने वाली ये प्रस्तुतियां केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जीवित रखने का भी जरिया हैं। आग और अंगारों से जुड़ी इन प्रस्तुतियों में विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
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