श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, ई-श्रम पोर्टल पर 31.89 करोड़ पंजीकरण

केंद्र सरकार सामाजिक सुरक्षा संहिता, ई-श्रम पोर्टल और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के जरिए श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा देने का प्रयास कर रही है। ई-श्रम पोर्टल पर अगस्त 2026 तक 31.89 करोड़ पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। जानें श्रमिकों के लिए पेंशन, बीमा, मातृत्व लाभ और अन्य सुविधाओं से जुड़ी प्रमुख जानकारियां।

Oct 31, 2026 - 15:09
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श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, ई-श्रम पोर्टल पर 31.89 करोड़ पंजीकरण
श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, ई-श्रम पोर्टल पर 31.89 करोड़ पंजीकरण
श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, ई-श्रम पोर्टल पर 31.89 करोड़ पंजीकरण
श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, ई-श्रम पोर्टल पर 31.89 करोड़ पंजीकरण

भारत में संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं चला रही है। इन पहलों में भविष्य निधि, पेंशन, बीमा, मातृत्व लाभ और अन्य कल्याणकारी सुविधाएं शामिल हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और आसान पंजीकरण व्यवस्था के जरिए इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

पात्र परिवारों को मिलती है 20 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता

योजना के तहत परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की 18 से 59 वर्ष की आयु के बीच मृत्यु होने पर पात्र परिवार को 20,000 रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य कमाने वाले सदस्य को खोने के बाद परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है।

सामाजिक सुरक्षा संहिता से श्रमिकों को व्यापक संरक्षण

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नौ केंद्रीय श्रम कानूनों को एक साझा विधायी ढांचे में शामिल किया गया है। इसमें भविष्य निधि, पेंशन, बीमा, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी और श्रमिक कल्याण से संबंधित अन्य प्रावधान हैं।

इस संहिता के दायरे में संगठित और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के अलावा गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। पात्र निश्चित अवधि के कर्मचारियों के लिए एक वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद आनुपातिक आधार पर ग्रेच्युटी का प्रावधान किया गया है।

महिला श्रमिकों को 26 सप्ताह तक मातृत्व लाभ देने, निर्धारित शर्तों के तहत घर से काम करने का विकल्प और पात्र प्रतिष्ठानों में क्रेच सुविधा उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान भी इसमें शामिल हैं। डिजिटल व्यवस्था और सरल अनुपालन प्रक्रिया के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक श्रमिकों की पहुंच आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है।

ई-श्रम पोर्टल पर 31.89 करोड़ श्रमिकों का पंजीकरण

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से अगस्त 2021 में ई-श्रम पोर्टल शुरू किया गया था। यह आधार से जुड़ा राष्ट्रीय डेटाबेस है, जिसमें पंजीकरण कराने वाले प्रत्येक श्रमिक को विशिष्ट यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) दिया जाता है।

अगस्त 2026 तक पोर्टल पर कुल 31.89 करोड़ पंजीकरण दर्ज किए गए। अक्टूबर 2024 में शुरू किए गए ई-श्रम वन-स्टॉप सॉल्यूशन के जरिए 15 सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को एकीकृत किया गया है।

यह पोर्टल श्रमिकों को रोजगार के अवसरों के लिए राष्ट्रीय करियर सेवा, कौशल विकास के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए मायस्कीम से भी जोड़ता है।

पीएम-एसवाईएम से असंगठित श्रमिकों को पेंशन का लाभ

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएम-एसवाईएम) असंगठित क्षेत्र के पात्र श्रमिकों के लिए स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है। इसके तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के ऐसे श्रमिक पंजीकरण करा सकते हैं, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये तक है और जो योजना की अन्य पात्रता शर्तें पूरी करते हैं।

योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलती है। इसके लिए उम्र के अनुसार 55 से 200 रुपये तक मासिक योगदान देना होता है। केंद्र सरकार भी लाभार्थी के बराबर राशि का योगदान करती है।

इस योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में नियमित आय का सहारा देना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, असंगठित क्षेत्र का देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 50 प्रतिशत योगदान है।

समावेशी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ते कदम

ईपीएफओ के व्यापक कवरेज, डिजिटल सेवाओं, पेंशन सुधारों और श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। भविष्य निधि, पेंशन, बीमा और आर्थिक सहायता से जुड़ी पहल संगठित तथा असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों और उनके परिवारों को वित्तीय सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म, सरल पंजीकरण और आसान दावा निपटान व्यवस्था के जरिए योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। इन पहलों का उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को जीवन के अलग-अलग चरणों में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

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