Green Energy Corridor Phase III: GEC-III को मंजूरी, 50 GWh BESS और 135 GW Renewable Energy पर फोकस
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने GEC-III योजना को मंजूरी दी है। ₹1.86 लाख करोड़ की इस योजना के तहत 50 GWh BESS और 135 GW तक नवीकरणीय ऊर्जा के ग्रिड इंटीग्रेशन को समर्थन मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करना और बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने की क्षमता बढ़ाना है।
सरकार के मुताबिक, GEC-III के जरिए 135 GW तक नवीकरणीय ऊर्जा की बिजली निकासी और ग्रिड इंटीग्रेशन को समर्थन मिलेगा। योजना में बैटरी स्टोरेज को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
50 GWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम
GEC-III के तहत 50 GWh Battery Energy Storage Systems (BESS) स्थापित किए जाएंगे। इन स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल ग्रिड में बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाने के लिए किया जाएगा।
BESS खास तौर पर उस समय उपयोगी होगा जब सौर या पवन ऊर्जा का उत्पादन कम हो। इसके अलावा स्टोरेज सिस्टम ग्रिड कंजेशन, पीक-ऑवर की मांग और नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित आपूर्ति से निपटने में मदद करेगा।
₹1.86 लाख करोड़ का कुल प्रोजेक्ट आउटले
GEC-III को वित्त वर्ष 2032-33 तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का कुल परियोजना परिव्यय ₹1,86,405 करोड़ है।
इसमें:
- ₹1,36,378 करोड़ — इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए
- ₹50,000 करोड़ — 50 GWh BESS के लिए
- ₹54,082 करोड़ — कुल केंद्रीय वित्तीय सहायता
शामिल है। सरकार के अनुसार केंद्रीय सहायता से इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क का बोझ कम करने में मदद मिलेगी, जिसका असर बिजली की लागत पर पड़ सकता है।
ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट में प्रतिस्पर्धी बोली
योजना के तहत सभी ग्रीनफील्ड इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाओं को Tariff-Based Competitive Bidding (TBCB) के जरिए लागू किया जाएगा। वहीं मौजूदा नेटवर्क के अपग्रेडेशन और ब्राउनफील्ड कार्यों को Cost Plus Basis पर किया जाएगा।
State Transmission Utilities योजना की समग्र कार्यान्वयन एजेंसी होंगी। वहीं Transmission Service Providers को TBCB प्रक्रिया के तहत Build-Own-Operate-Maintain (BOOM) मॉडल पर परियोजनाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
900 GW गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य में योगदान
सरकार के अनुसार GEC-III देश में 2035 तक 900 GW स्थापित गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देगा।
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की संख्या बढ़ने के साथ मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी है। इसके अलावा बैटरी स्टोरेज से अतिरिक्त बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे ग्रिड में सौर और पवन ऊर्जा का ज्यादा प्रभावी एकीकरण संभव होगा।
रोजगार और घरेलू स्टोरेज उद्योग को बढ़ावा
GEC-III के लागू होने से पावर, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
50 GWh BESS के निर्माण और तैनाती से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसके साथ राज्यों में संचालन, रखरखाव और ग्रिड मैनेजमेंट से जुड़े कुशल रोजगार के अवसर विकसित होंगे।
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