भारत 6जी मिशन: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का किया उद्घाटन

नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित तीसरी अंतरराष्ट्रीय भारत 6जी संगोष्ठी 2026 में पांच नए समझौता ज्ञापनों और नौ श्वेत पत्रों की घोषणा की गई। जानिए भारत के 6जी मिशन, वैश्विक साझेदारी और भविष्य की दूरसंचार तकनीक से जुड़ी प्रमुख बातें।

Oct 09, 2026 - 09:51
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भारत 6जी मिशन: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का किया उद्घाटन

नई दिल्ली: भारत में अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक विकसित करने और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से तीसरी अंतरराष्ट्रीय भारत 6जी संगोष्ठी 2026 का आयोजन किया जा रहा है। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने गुरुवार को नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान 6जी तकनीक से जुड़े पांच नए समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया और नौ कार्य समूहों के श्वेत पत्र जारी किए गए।

भारत 6जी अलायंस की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में दूरसंचार उद्योग, वैश्विक प्रौद्योगिकी संगठनों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य 6जी तकनीक के अनुसंधान, विकास, परीक्षण, मानकीकरण और व्यावहारिक उपयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करना है।

पांच वैश्विक संगठनों के साथ सहयोग

संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर भारत 6जी अलायंस ने पांच संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। इनमें जीएसएमए (GSMA), वन6जी एसोसिएशन (one6G Association), जीटीआई एलायंस लिमिटेड (GTI Alliance Limited), 6जी इंडस्ट्री फोरम (6GIF) और वॉइस (VOICE) शामिल हैं।

इन समझौतों के जरिए अगली पीढ़ी के नेटवर्क के विकास, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय मानकों को तैयार करने में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे भारतीय संस्थानों और वैश्विक दूरसंचार उद्योग के बीच तकनीकी तालमेल को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

17 साझेदारों तक पहुंचा सहयोग नेटवर्क

नए समझौतों के बाद भारत 6जी अलायंस का सहयोग नेटवर्क बढ़कर 17 साझेदारों तक पहुंच गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अलायंस के पास पहले से 10 अंतरराष्ट्रीय और दो घरेलू समझौता ज्ञापन या समझौता आशय पत्र थे। नई साझेदारियां इस नेटवर्क के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

इस सहयोग का उद्देश्य भारत में 6जी अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करने के साथ वैश्विक तकनीकी मानकों के निर्माण में देश की भागीदारी बढ़ाना है।

6जी तकनीक पर नौ श्वेत पत्र जारी

कार्यक्रम में भारत 6जी अलायंस के नौ कार्य समूहों की ओर से तैयार श्वेत पत्र भी जारी किए गए। इन दस्तावेजों में 6जी तकनीक के विकास और भविष्य की दूरसंचार जरूरतों से जुड़े विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है।

इनमें भारत में अनुसंधान एवं विकास के लिए 6जी रोडमैप, इंटीग्रेटेड सेंसिंग एंड कम्युनिकेशन (ISAC), फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस, 6जी नेटवर्क में ऑप्टिकल तकनीक की भूमिका और वर्ष 2030 तथा उसके बाद के लिए आईएमटी स्पेक्ट्रम की तैयारी जैसे विषय प्रमुख हैं।

इसके अलावा सस्टेनेबल नेटवर्क, कार्बन उत्सर्जन घटाने वाले नेटवर्क डिजाइन, सेलुलर और वाई-फाई नेटवर्क के बीच तालमेल, कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क और 6जी सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है।

टिकाऊ और सुरक्षित नेटवर्क बनाने पर जोर

भविष्य के 6जी नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल और व्यापक रूप से उपयोगी बनाने के लिए तकनीकी समाधान विकसित करना संगोष्ठी का प्रमुख एजेंडा है। श्वेत पत्रों में नेटवर्क सुरक्षा, स्पेक्ट्रम प्रबंधन, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और उद्योगों में 6जी के संभावित इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया है।

इन दस्तावेजों के माध्यम से उद्योग, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के योगदान को सामने लाने तथा तकनीकी विकास के लिए साझा दिशा तय करने का प्रयास किया गया है।

नई दिल्ली 6जी घोषणा पर प्रगति रिपोर्ट जारी

संगोष्ठी के दौरान नई दिल्ली घोषणा के 6जी सिद्धांतों की दिशा में हुई प्रगति पर एक संयुक्त रिपोर्ट भी जारी की गई। अक्टूबर 2026 में प्रकाशित इस रिपोर्ट में पिछले एक वर्ष के दौरान विभिन्न साझेदारों की ओर से किए गए प्रयासों और हासिल परिणामों का आकलन किया गया है।

नई दिल्ली घोषणा का उद्देश्य 6जी तकनीक के लिए ऐसा वैश्विक ढांचा विकसित करना है, जो सुरक्षित, खुला, समावेशी, टिकाऊ और विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने वाला हो।

रिपोर्ट में अब तक उठाए गए कदमों के साथ भविष्य में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया है। इससे साझा सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप देने और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

9 अक्टूबर तक चलेगी संगोष्ठी

यशोभूमि में 7 से 9 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में वैश्विक 6जी दृष्टिकोण, तकनीकी मानक, परीक्षण केंद्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नेटवर्क, ऊर्जा दक्षता, स्पेक्ट्रम और उद्योगों में नई तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा की जा रही है।

भारत 6जी अलायंस का लक्ष्य घरेलू अनुसंधान और वैश्विक साझेदारी को साथ लेकर सुरक्षित, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 6जी नेटवर्क विकसित करने में भारत की भूमिका को मजबूत करना है। इन पहलों से आने वाले वर्षों में दूरसंचार क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

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