UNSC सुधारों पर भारत की मांग, नए स्थायी सदस्यों को भी मिले वीटो अधिकार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों को लेकर भारत ने ‘छिपे वीटो’ और आम सहमति की शर्त पर सवाल उठाए हैं। भारतीय प्रतिनिधि पी. हरीश ने मसौदे पर आधारित बातचीत जल्द शुरू करने और नए स्थायी सदस्यों को भी वीटो अधिकार देने की मांग दोहराई।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की प्रक्रिया को बाधित करने वाले कथित अप्रत्यक्ष वीटो पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुई चर्चा के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि सुधारों से जुड़ी वार्ताओं में ‘आम सहमति’ की शर्त का इस्तेमाल प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रोकने के लिए किया जा रहा है। भारत ने स्पष्ट समय-सीमा और ठोस लक्ष्यों के साथ मसौदे पर आधारित बातचीत शुरू करने की मांग की।
‘आम सहमति’ की शर्त पर भारत ने जताई चिंता
पी. हरीश के अनुसार, सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए चल रही अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) में प्रक्रियागत मतभेदों के कारण प्रगति नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि ‘आम सहमति’ को अनिवार्य बनाने की मांग व्यवहार में एक ऐसे वीटो की तरह काम कर सकती है, जो औपचारिक रूप से दर्ज नहीं है।
उन्होंने 2008 में महासभा द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि सुधार प्रक्रिया का उद्देश्य व्यापक राजनीतिक समर्थन हासिल करना है, न कि हर मुद्दे पर पूर्ण सहमति को अनिवार्य बनाना। भारत का कहना है कि कई दौर की बातचीत के बावजूद ठोस परिणाम नहीं निकले हैं। इसलिए वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य और समय-सीमा तय की जानी चाहिए।
इटली और पाकिस्तान सहित कुछ देशों की भूमिका पर सवाल
भारत ने ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ समूह का उल्लेख किया, जिसमें इटली और पाकिस्तान सहित कई देश शामिल हैं। इस समूह के सदस्य सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों पर अलग रुख रखते हैं। पी. हरीश ने आरोप लगाया कि प्रक्रियागत अड़चनों के कारण वार्ता के लिए एक औपचारिक मसौदा तैयार करने की दिशा में प्रगति प्रभावित हुई है।
प्रतिबंध समितियों में भी अप्रत्यक्ष रोक का मुद्दा
भारतीय प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समितियों और अन्य निर्णय प्रक्रियाओं में आम सहमति के अनौपचारिक नियमों पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, कुछ मामलों में किसी एक सदस्य की आपत्ति के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाते, जबकि आपत्ति के कारणों का सार्वजनिक स्पष्टीकरण भी नहीं मिलता।
हरीश ने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध प्रक्रिया में कई प्रस्तावों को रोकने में भूमिका निभाई है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े व्यक्तियों के नाम शामिल रहे हैं।
भारत की मांग: नए स्थायी सदस्यों को भी मिले वीटो
भारत ने दोहराया कि सुरक्षा परिषद में सुधार का अर्थ केवल मौजूदा वीटो व्यवस्था को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि परिषद की सदस्यता और प्रतिनिधित्व का विस्तार करना भी है। पी. हरीश ने कहा कि परिषद को मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए, ताकि उसकी विश्वसनीयता, वैधता और प्रभावशीलता मजबूत हो सके।
भारत का रुख है कि यदि वीटो का अधिकार व्यवस्था में बना रहता है, तो सुधार के बाद शामिल होने वाले सभी नए स्थायी सदस्यों को भी समान अधिकार मिलना चाहिए। भारत ने लंबे कार्यकाल वाले या वीटो अधिकार से वंचित स्थायी सदस्यों जैसी अलग-अलग श्रेणियां बनाने के विचार पर भी आपत्ति जताई। उसके अनुसार, ऐसी व्यवस्था असमानता को और बढ़ा सकती है।
वीटो पर जवाबदेही को लेकर भी उठाए सवाल
भारत ने वीटो का इस्तेमाल करने वाले देशों से संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने स्पष्टीकरण मांगने की व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए। भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य जवाबदेही बढ़ाना था, लेकिन वीटो के इस्तेमाल में वृद्धि से इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं।
भारत ने व्यापक और समयबद्ध सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधिक और निष्पक्ष बनाने के लिए वार्ता को ठोस परिणामों की ओर ले जाना जरूरी है।
प्रकाशन से पहले नोट: संयुक्त राष्ट्र की बैठक की तारीख, 2008 के प्रस्ताव का विवरण, IGN की मौजूदा स्थिति और प्रतिबंध सूची से जुड़े नामों की आधिकारिक UN स्रोतों से पुष्टि कर लें।
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