AI हॉरर फिल्म ‘जमलोक’ का पोस्टर रिलीज, तीन महीने में बनाने की तैयारी

भारतीय फिल्म उद्योग में AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। कोयल और वेवबैंड प्रोडक्शन की प्रस्तावित हॉरर फिल्म ‘जमलोक’ का पोस्टर दिल्ली में जारी हुआ। निर्माताओं का लक्ष्य इसे लगभग तीन महीने में पूरा करना है।

Oct 11, 2026 - 17:01
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AI हॉरर फिल्म ‘जमलोक’ का पोस्टर रिलीज, तीन महीने में बनाने की तैयारी
AI हॉरर फिल्म ‘जमलोक’ का पोस्टर रिलीज, तीन महीने में बनाने की तैयारी
AI हॉरर फिल्म ‘जमलोक’ का पोस्टर रिलीज, तीन महीने में बनाने की तैयारी

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब भारतीय फिल्म निर्माण में नई संभावनाएं खोल रहा है। इसी दिशा में AI फिल्म निर्माण कंपनी कोयल और ‘मस्ती 4’ बना चुकी वेवबैंड प्रोडक्शन ने हॉरर फिल्म ‘जमलोक’ के लिए साझेदारी की है। निर्माताओं ने इसे दुनिया की पहली AI हॉरर फिल्म बताया है। शनिवार को दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘अनकैनी इंडिया’ फेस्टिवल के दौरान फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया गया।

फिल्म को कई भाषाओं में बनाने की योजना है। इसमें बॉलीवुड और टॉलीवुड के जाने-माने कलाकारों को शामिल करने के लिए बातचीत चल रही है। फिल्म की खासियत यह होगी कि कलाकार वास्तविक रूप से अभिनय करेंगे, जबकि सेट, बैकग्राउंड, अतिरिक्त किरदारों, कॉस्ट्यूम और अन्य दृश्य तत्वों को तैयार करने में AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

तीन महीने में फिल्म पूरी करने का लक्ष्य

कोयल के सह-संस्थापक और CEO मेहुल अग्रवाल के मुताबिक, ‘जमलोक’ को लगभग तीन महीने में पूरा करने की योजना है। फिल्म में वास्तविक कलाकारों के अभिनय और AI से तैयार किए गए विजुअल्स का मेल देखने को मिलेगा।

मेहुल अग्रवाल ने बताया कि भावनात्मक दृश्यों में कलाकारों के वास्तविक अभिनय को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, फिल्म की काल्पनिक दुनिया और बड़े पैमाने पर दृश्य तैयार करने के लिए AI का उपयोग किया जाएगा। इससे पारंपरिक फिल्म निर्माण के कुछ चरणों में लगने वाले समय को कम करने की संभावना है।

असली अभिनय के साथ AI विजुअल्स

फिल्म निर्माताओं की योजना अभिनय और तकनीक को इस तरह जोड़ने की है कि कहानी का प्रभाव बना रहे। AI की मदद से सेट, बैकग्राउंड, अतिरिक्त पात्रों और अन्य दृश्य सामग्री को तैयार किया जाएगा। डिजिटल रूप में कलाकारों की शक्ल-सूरत के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।

पोस्टर लॉन्च के अवसर पर वेवबैंड प्रोडक्शन के अमर झुनझुनवाला और सह-संस्थापक शिखा करण अहलूवालिया मौजूद रहीं। यह परियोजना ऐसे समय में सामने आई है, जब मनोरंजन उद्योग में AI आधारित वीडियो और फिल्म निर्माण को लेकर प्रयोग बढ़ रहे हैं।

दिल्ली में आयोजित हुआ ‘अनकैनी इंडिया’ फेस्टिवल

‘जमलोक’ का पोस्टर दिल्ली में हुए ‘अनकैनी इंडिया’ फेस्टिवल के दौरान जारी किया गया। यह कोयल के ‘अनकैनी वैली फेस्ट’ का भारत में पहला आयोजन था। इसमें फिल्म निर्माताओं, कंटेंट क्रिएटर्स, विद्यार्थियों और तकनीकी क्षेत्र के पेशेवरों ने हिस्सा लिया।

फेस्टिवल के दौरान प्रतिभागियों को AI की सहायता से एक ही दिन में फिल्म बनाने की चुनौती दी गई। इस प्रयोग का उद्देश्य यह समझना था कि नई तकनीक किस तरह कहानी लिखने से लेकर उसे स्क्रीन पर प्रस्तुत करने तक की प्रक्रिया को बदल सकती है।

तीन श्रेणियों में दिखाई गईं AI फिल्में

प्रतियोगिता को विज्ञापन फिल्म, म्यूजिक वीडियो और शॉर्ट फिल्म जैसी तीन श्रेणियों में बांटा गया था। इन श्रेणियों से चुनी गईं नौ फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई।

प्रतिभागियों ने कम समय में कहानी, संगीत और विजुअल तैयार करने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल किया। इससे फिल्म निर्माण में तकनीकी सहायता के साथ-साथ रचनात्मक प्रयोगों की संभावनाएं भी सामने आईं।

आयोजकों के अनुसार, कोयल का यह फेस्टिवल पहले सैन फ्रांसिस्को में Y Combinator, ऑस्टिन में SXSW और पिट्सबर्ग में कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी जैसे स्थानों पर आयोजित हो चुका है।

फिल्म और विज्ञापन जगत के विशेषज्ञों ने किया मूल्यांकन

फेस्टिवल की अलग-अलग प्रतियोगिताओं के लिए फिल्म, विज्ञापन, संगीत और तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों को जूरी में शामिल किया गया। विज्ञापन फिल्म श्रेणी में क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग के समीर दातार और एस्ट्रा स्टूडियोज के राजाराजन रामकृष्णन ने मूल्यांकन किया।

म्यूजिक वीडियो श्रेणी की जूरी में ऑफबीट मीडिया ग्रुप के जयदीप सिंह और बॉम्बे लोकल के अनुपम सिद्धांत शामिल थे। वहीं, शॉर्ट फिल्म श्रेणी का मूल्यांकन अन्नपूर्णा स्टूडियोज के CTO सीवी राव, अमर चित्र कथा के CEO अमन श्रीवास्तव और वेवबैंड प्रोडक्शन की शिखा करण अहलूवालिया ने किया।

AI और भारतीय कहानी कहने के तरीकों पर चर्चा

कार्यक्रम में AI, भारतीय संस्कृति और कहानी कहने के बदलते स्वरूप पर दो पैनल चर्चाएं भी हुईं। पहली चर्चा में भारतीय कहानियों की वैश्विक पहुंच, संस्कृति और AI के प्रभाव पर विचार साझा किए गए।

दूसरी चर्चा में फिल्म निर्माण के पारंपरिक तरीकों पर AI के प्रभाव को लेकर बातचीत हुई। इसमें प्री-प्रोडक्शन से पोस्ट-प्रोडक्शन तक तकनीक के इस्तेमाल, समय और लागत में संभावित बदलावों तथा रचनात्मक प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

फेस्टिवल में टेक्निकल गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध कंटेंट क्रिएटर गौरव चौधरी के साथ विशेष बातचीत भी हुई। कार्यक्रम में पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव हरिकिशोर एस. समेत अन्य अतिथियों ने भी हिस्सा लिया।

कोयल 3.0 प्लेटफॉर्म भी किया गया पेश

फेस्टिवल के दौरान कोयल ने अपने AI फिल्म निर्माण प्लेटफॉर्म का नया संस्करण ‘कोयल 3.0’ प्रस्तुत किया। कंपनी का दावा है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए स्क्रिप्ट या वॉयस रिकॉर्डिंग को फिल्म में बदला जा सकता है।

इसमें अलग-अलग दृश्यों के बीच किरदारों और लोकेशन की निरंतरता बनाए रखने पर ध्यान दिया गया है। AI से वीडियो बनाते समय किसी पात्र के चेहरे, कपड़ों और आसपास के वातावरण को लगातार एक जैसा रखना प्रमुख तकनीकी चुनौतियों में शामिल है।

मनोरंजन जगत में कोयल का काम

कोयल की स्थापना मेहुल अग्रवाल और गौरी अग्रवाल ने की थी। कंपनी के अनुसार, वह यूनिवर्सल म्यूजिक, टी-सीरीज और मैडॉक जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुकी है। इसके अलावा एआर रहमान, शंकर महादेवन और रिकी केज जैसे संगीतकारों से जुड़े म्यूजिक वीडियो प्रोजेक्ट्स में भी इसकी भागीदारी रही है।

कंपनी को अमेरिकी स्टार्टअप एक्सेलेरेटर Y Combinator का समर्थन भी मिला है। ‘जमलोक’ के जरिए कोयल और वेवबैंड प्रोडक्शन AI तकनीक के इस्तेमाल को फीचर फिल्म के स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या AI बदलेगा भारतीय सिनेमा का भविष्य?

‘जमलोक’ की घोषणा भारतीय फिल्म उद्योग में AI के बढ़ते इस्तेमाल की दिशा में एक नया प्रयोग है। फिल्म की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक और वास्तविक अभिनय का मेल दर्शकों को कितना प्रभावी लगता है।

इसके साथ ही कलाकारों की डिजिटल पहचान, कॉपीराइट, रचनात्मक अधिकार और AI से तैयार सामग्री के इस्तेमाल जैसे मुद्दे भी अहम बने रहेंगे। फिल्म की रिलीज और उसके अंतिम स्वरूप के सामने आने के बाद ही इसके प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

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