मथुरा से दिल्ली तक गूंजा कृष्ण जन्मोत्सव, आधी रात को जयकारों से भक्तिमय हुआ माहौल
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों में जयकारों, आरती और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और ढोल-नगाड़ों के बीच जन्मोत्सव मनाया। देश के अलग-अलग हिस्सों में भी भक्तों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाया।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव देशभर में श्रद्धा, उमंग और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। जैसे ही घड़ी की सुई रात 12 बजे पर पहुंची, मंदिरों में घंटियां और शंखनाद गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया।
मथुरा में जन्माष्टमी का विशेष उत्साह देखने को मिला। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे भक्त भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन के लिए उत्साहित नजर आए।
जन्मभूमि मंदिर में आधी रात को विशेष आयोजन
रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल चरम पर पहुंच गया। आरती और पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। ढोल, नगाड़ों और धार्मिक जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने के साथ दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
भक्तों में दिखी गहरी आस्था
जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान कृष्ण के प्रति अपनी आस्था और भावनाएं साझा कीं। कई भक्तों ने कहा कि जन्मभूमि पर कृष्ण जन्मोत्सव में शामिल होना उनके लिए बेहद खास अनुभव है।
कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि वे वर्षों से जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा आते रहे हैं। उनके लिए मंदिर में दर्शन और कृष्ण जन्मोत्सव का हिस्सा बनना आध्यात्मिक खुशी का अवसर है।
देश के कई हिस्सों में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम
मथुरा के अलावा दिल्ली-एनसीआर, द्वारका, बेंगलुरु और देश के कई अन्य शहरों में भी जन्माष्टमी पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया गया और भक्तों ने पूजा, आरती, भजन-कीर्तन तथा झांकियों में हिस्सा लिया।
देश के बाहर भी कई स्थानों पर भारतीय समुदाय ने कृष्ण जन्माष्टमी को धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया।
बेहतर व्यवस्थाओं से श्रद्धालुओं को राहत
मथुरा में जन्माष्टमी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए गए, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान कम से कम परेशानी हो।
कृष्ण जन्मभूमि पर उमड़ी भीड़ और आधी रात को हुए जन्मोत्सव ने एक बार फिर मथुरा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर दिया। भक्तों के लिए यह अवसर केवल उत्सव नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष मौका रहा।
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