नेपाल में भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़, 4 लोगों की मौत; 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित
नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रशासन ने कई जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को हाई अलर्ट पर रहने की सलाह दी है।
नेपाल के तिब्बत सीमा से सटे रसुवा जिले और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से भीषण बाढ़ आ गई। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई इलाकों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।
बाढ़ के कारण आठ संचालित और पांच निर्माणाधीन सहित कुल 13 जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर
अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में पानी का स्तर अचानक तेजी से बढ़ा। बाढ़ का असर रसुवा के अलावा नुवाकोट और धादिंग जिलों तक भी पहुंचा।
स्थानीय स्तर पर भारी बारिश को इस बाढ़ का सीधा कारण नहीं माना जा रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि तिब्बत की तरफ हुई भारी बारिश, हिमस्खलन या ग्लेशियर से जुड़ी किसी घटना के कारण नदी में अचानक पानी बढ़ा हो सकता है।
चार लोगों की मौत
बागमती प्रांत पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका क्षेत्र से चार शव बरामद किए गए हैं। इनमें तीन पुरुष और एक महिला शामिल हैं।
बाढ़ के बाद त्रिशूली नदी के आसपास शव मिलने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की ओर से लापता लोगों की तलाश भी जारी है।
रसुवा में सबसे ज्यादा नुकसान
तिब्बत सीमा के पास स्थित रसुवा जिले में बाढ़ का प्रभाव सबसे ज्यादा देखा गया। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने से वाहन, सामान और अन्य संपत्तियां बह गईं।
अधिकारियों के मुताबिक, दोनों क्षेत्रों में बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से ऊंचा था और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।
सीमा शुल्क परिसर और पुल क्षतिग्रस्त
रसुवा के सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान बाढ़ के पानी में बह गए। इसके अलावा हाल में तैयार किया गया एक पुल भी क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है।
यह क्षेत्र नेपाल और तिब्बत के बीच व्यापारिक आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। बाढ़ से इस मार्ग पर परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।
बाढ़ के कारण की जांच जारी
नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि स्थानीय बारिश इतनी अधिक नहीं थी कि उससे इस स्तर की बाढ़ आ सके।
ऐसे में तिब्बत की तरफ किसी हिमस्खलन, ग्लेशियर टूटने या ग्लेशियर झील से अचानक पानी निकलने जैसी घटना की संभावनाओं की जांच की जा रही है। वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए संबंधित एजेंसियां अध्ययन कर रही हैं।
पांच जिलों में हाई अलर्ट
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत की ओर से अचानक पानी बढ़ने का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित
इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल के अनुसार, बाढ़ से कुल 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें आठ पहले से संचालित परियोजनाएं हैं, जबकि पांच का निर्माण चल रहा था।
प्रभावित परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब 354 मेगावाट बताई गई है। रसुवागढ़ी, संजेन खोला और अपर त्रिशूली-3ए जैसी प्रमुख परियोजनाओं पर भी बाढ़ का असर पड़ा है।
कई बस्तियों में घुसा पानी
बाढ़ से रसुवा और आसपास के इलाकों की करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं। स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेतार, शांतिबाजार, पाइरेबेसी और अन्य क्षेत्रों में पानी पहुंचने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
कई स्थानों पर सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
सेना और सुरक्षा बल राहत कार्य में जुटे
नेपाल में आपात बैठक के बाद सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव के लिए तैनात किया गया।
सुरक्षा बलों की टीमें लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हैं।
हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू अभियान
नेपाल सेना ने राहत अभियान के लिए कई हेलीकॉप्टरों को लगाया है। प्रभावित इलाकों से लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
त्रिशूली क्षेत्र में प्रभावित लोगों के उपचार के लिए चिकित्सा सुविधा भी स्थापित की गई है। सेना के मेडिकल स्टाफ को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात किया गया है।
पुलिसकर्मी भी लापता
बाढ़ की चपेट में कई पुलिस प्रतिष्ठान भी आए हैं। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत कुछ पुलिस चौकियों को नुकसान पहुंचा है।
सशस्त्र पुलिस बल के अधिकारियों के अनुसार, रसुवा जिले में उसके चार जवानों के लापता होने की सूचना है। उनकी तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
ड्रोन और स्निफर डॉग से तलाश
बचाव अभियान में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में ड्रोन भेजे गए हैं, जबकि लापता लोगों की तलाश के लिए प्रशिक्षित स्निफर डॉग की मदद ली जा रही है।
घायलों के इलाज के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम भी प्रभावित क्षेत्र में पहुंचाई गई है।
पिछले साल भी आई थी बाढ़
भोटे कोशी नदी क्षेत्र में पिछले साल भी गंभीर बाढ़ की घटना सामने आई थी। उस दौरान रसुवा जिले में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था और कई लोगों की जान गई थी।
इस बार की बाढ़ ने एक बार फिर नदी किनारे बसे इलाकों की संवेदनशीलता और हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को सामने ला दिया है।
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