भारत की रेटिंग में बड़ा सुधार, JCR ने ‘BBB+’ से बढ़ाकर ‘A- Stable’ किया

जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी JCR ने भारत की लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- Stable कर दिया है। मजबूत आर्थिक वृद्धि, सरकारी निवेश और बैंकिंग सेक्टर की बेहतर स्थिति को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

Sep 02, 2026 - 15:04
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भारत की रेटिंग में बड़ा सुधार, JCR ने ‘BBB+’ से बढ़ाकर ‘A- Stable’ किया

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक और सकारात्मक खबर सामने आई है। जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की फॉरेन करेंसी लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग और लोकल करेंसी लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग को ‘BBB+’ से बढ़ाकर ‘A- Stable’ कर दिया है। एजेंसी ने रेटिंग में इस सुधार के पीछे भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि को प्रमुख कारण बताया है।

7 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है विकास की रफ्तार

JCR के आकलन के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। निजी खपत और सरकारी निवेश को आर्थिक विस्तार के प्रमुख आधारों में शामिल किया गया है।

एजेंसी ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और GST जैसे सुधारों को भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती में योगदान देने वाला बताया है। इन नीतिगत कदमों से देश की आर्थिक क्षमता और आधार को मजबूती मिली है।

वित्त वर्ष 2026 में 7.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान

JCR के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एजेंसी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था 6 प्रतिशत से अधिक की दर से आगे बढ़ सकती है।

टैक्स व्यवस्था से जुड़े बदलावों और घरेलू मांग को भी आर्थिक गतिविधियों के लिए सहारा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते खाद्य कीमतों पर दबाव की स्थिति बनी हुई है।

महंगाई पर नजर, लेकिन स्थिति नियंत्रण में

भू-राजनीतिक तनाव और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद JCR के आकलन के अनुसार महंगाई फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित लक्ष्य के दायरे में बनी हुई है।

बैंकिंग सेक्टर की मजबूती भी बनी सकारात्मक वजह

JCR ने भारत के बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति को भी मजबूत बताया है। एजेंसी के मुताबिक बैंकों का नॉन-परफॉर्मिंग लोन (NPL) अनुपात 2 प्रतिशत से नीचे आ गया है।

बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के पीछे RBI की निगरानी और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) जैसे संस्थागत सुधारों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है। इससे बैंकिंग सिस्टम की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद मिली है।

पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही GDP ग्रोथ

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान भारत की GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह दर 6.9 प्रतिशत थी। इस तरह सालाना आधार पर पहली तिमाही की वृद्धि में 0.9 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ।

यह आंकड़ा RBI के पहले लगाए गए अनुमान से भी बेहतर रहा। केंद्रीय बैंक ने इससे पहले वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए 7 प्रतिशत GDP वृद्धि का अनुमान जताया था।

वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति को मिला बल

JCR की ओर से रेटिंग में किया गया यह सुधार भारत की अर्थव्यवस्था के प्रति अंतरराष्ट्रीय भरोसे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी निवेश, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार जैसे कारक भारत की आर्थिक क्षमता को सहारा दे रहे हैं।

हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां, ऊर्जा और खाद्य कीमतें तथा बाहरी आर्थिक जोखिम आगे भी भारत के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी रह सकती हैं।

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