India Foodgrain Production: खाद्यान्न उत्पादन 376.56 मिलियन टन पहुंचने का अनुमान, भंडारण व्यवस्था पर जोर

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है। सरकार विकेंद्रीकृत भंडारण व्यवस्था के जरिए किसानों और खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

Sep 03, 2026 - 15:54
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India Foodgrain Production: खाद्यान्न उत्पादन 376.56 मिलियन टन पहुंचने का अनुमान, भंडारण व्यवस्था पर जोर

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक भारत में कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 357.732 मिलियन टन था। यानी एक साल में खाद्यान्न उत्पादन में करीब 18.8 मिलियन टन यानी 5.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक फैक्टशीट में यह जानकारी दी गई। देश में बढ़ते कृषि उत्पादन के साथ खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्थानीय स्तर पर अनाज के भंडारण ढांचे को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

करीब 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ

भारत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत दुनिया के बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक संचालित करता है। इस व्यवस्था के तहत देश में करीब 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिलता है।

बढ़ते उत्पादन और व्यापक खाद्य वितरण व्यवस्था को देखते हुए सरकार अब भंडारण क्षमता को स्थानीय स्तर तक मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है।

PACS के जरिए मजबूत हो रहा अनाज भंडारण

सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, सहकारी क्षेत्र में वर्ष 2023 में शुरू की गई विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से भंडारण, खरीद, प्रसंस्करण और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

योजना को संस्थागत सहयोग और वित्तीय सहायता के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। शुरुआत में 11 राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट लागू किए गए थे और अब इसका दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

जुलाई 2026 तक 313 PACS में गोदाम तैयार

फैक्टशीट के अनुसार, जुलाई 2026 तक देशभर में 313 PACS में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका था। इनके जरिए 1.80 लाख टन से ज्यादा की अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार हुई है।

इस व्यवस्था में सिर्फ भंडारण क्षमता बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि अनाज की गुणवत्ता, पारदर्शी संचालन और परियोजनाओं की व्यावहारिकता को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

किसानों को मिलेगा बेहतर कीमत का विकल्प

विकेंद्रीकृत भंडारण व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को फसल कटाई के तुरंत बाद कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी से बचाना है। स्थानीय स्तर पर भंडारण सुविधा उपलब्ध होने से किसान अपनी उपज को सुरक्षित रखकर बाजार की बेहतर परिस्थितियों का इंतजार कर सकते हैं।

इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य हासिल करने और आय के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

परिवहन लागत कम करने पर भी जोर

योजना के जरिए खरीद केंद्रों, भंडारगृहों और उचित मूल्य की दुकानों के बीच खाद्यान्न के परिवहन की लागत कम करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

स्थानीय स्तर पर भंडारण की सुविधा विकसित होने से अनाज को लंबी दूरी तक ले जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे खाद्य वितरण प्रणाली को अधिक कुशल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

11 राज्यों में शुरू हुए पायलट प्रोजेक्ट

विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के पायलट प्रोजेक्ट महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा में लागू किए गए।

सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से सहकारी संस्थाओं के स्तर पर स्थानीय भंडारण ढांचे को विकसित करने का व्यावहारिक अनुभव मिला है। पायलट प्रोजेक्ट ने यह भी दिखाया है कि PACS के माध्यम से भंडारण और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत किया जा सकता है।

PACS की भूमिका हो रही व्यापक

योजना का उद्देश्य केवल अनाज रखने के लिए गोदाम बनाना नहीं है। इसके जरिए PACS की भूमिका को कृषि से जुड़ी कई गतिविधियों में विस्तार देने की कोशिश की जा रही है।

भंडारण, खरीद, प्रसंस्करण और वितरण जैसी गतिविधियों को सहकारी स्तर पर बढ़ावा मिलने से किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है।

बढ़ते खाद्यान्न उत्पादन के साथ देश में मजबूत और विकेंद्रीकृत भंडारण नेटवर्क खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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