उत्तर कोरिया की चेतावनी के बावजूद ‘फ्रीडम एज’ सैन्य अभ्यास करेगा दक्षिण कोरिया, अमेरिका-जापान भी होंगे शामिल
उत्तर कोरिया के विरोध के बावजूद दक्षिण कोरिया ने अमेरिका और जापान के साथ ‘फ्रीडम एज’ संयुक्त सैन्य अभ्यास कराने का फैसला बरकरार रखा है। तीनों देशों का यह अभ्यास 7 से 11 सितंबर तक जेजू द्वीप के आसपास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में होगा।
सियोल: उत्तर कोरिया की ओर से लगातार आपत्ति जताए जाने के बावजूद दक्षिण कोरिया ने अमेरिका और जापान के साथ प्रस्तावित संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘फ्रीडम एज’ को तय समय पर आयोजित करने का फैसला किया है। दक्षिण कोरियाई सेना के मुताबिक, फिलहाल अभ्यास की योजना में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रवक्ता कैप्टन जांग दो-यंग ने बताया कि ‘फ्रीडम एज’ तीनों देशों के बीच नियमित रूप से आयोजित होने वाला रक्षात्मक अभ्यास है। इसका मकसद उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल खतरों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना तथा क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है।
7 से 11 सितंबर तक होगा अभ्यास
अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान ने पिछले सप्ताह संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि इस साल का बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास 7 से 11 सितंबर के बीच किया जाएगा। अभ्यास दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप के पूर्व और दक्षिण में स्थित अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में आयोजित होगा।
यह ‘फ्रीडम एज’ अभ्यास का चौथा संस्करण है। इसे तीनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और सुरक्षा सहयोग की अहम कड़ी माना जाता है।
उत्तर कोरिया ने जताई कड़ी आपत्ति
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को प्रस्तावित सैन्य अभ्यास की आलोचना की थी। प्योंगयांग ने इसे अपने खिलाफ शत्रुतापूर्ण सैन्य गतिविधि का संकेत बताया और कहा कि अमेरिका की मौजूदा नीतियों के रहते कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम होने की उम्मीद मुश्किल है।
उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है और इन्हें संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के तौर पर देखता है।
कैंप डेविड बैठक के बाद बढ़ा सहयोग
‘फ्रीडम एज’ अभ्यास की शुरुआत तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों के तहत हुई। अगस्त 2023 में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के नेताओं की कैंप डेविड बैठक के बाद इस तरह के त्रिपक्षीय सैन्य सहयोग को और व्यवस्थित किया गया।
अब तक इस अभ्यास के तीन संस्करण आयोजित हो चुके हैं। इनका आयोजन 2024 और 2025 में अलग-अलग मौकों पर किया गया था।
अभ्यास में बदलाव को लेकर अटकलें
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की हालिया प्रतिक्रिया के पीछे अमेरिका की भविष्य की नीति को परखने की कोशिश भी हो सकती है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, प्योंगयांग यह देखना चाहता है कि अमेरिकी प्रशासन उत्तर कोरियाई नेतृत्व के साथ संभावित बातचीत के लिए सैन्य अभ्यासों में किसी तरह की नरमी दिखाता है या नहीं।
हालांकि, दक्षिण कोरिया ने फिलहाल स्पष्ट कर दिया है कि ‘फ्रीडम एज’ के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच सुरक्षा सहयोग जारी रहने के संकेत मिलते हैं।
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