PM-AJAY योजना: 18,093 गांव बने आदर्श ग्राम, 785 छात्रावास तैयार
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत देशभर में 18,093 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है। योजना में 47,200 से अधिक गांव शामिल हैं और 46,944 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा, विद्यार्थियों के लिए 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत देशभर में अनुसूचित जाति बहुल गांवों के विकास और विद्यार्थियों के लिए छात्रावास निर्माण का काम आगे बढ़ रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक, योजना के अंतर्गत अब तक 18,093 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया जा चुका है। वहीं, विद्यार्थियों की आवासीय सुविधाओं के लिए 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा हो गया है।
मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आदर्श ग्राम घटक में 47,200 से अधिक गांवों को शामिल किया गया है। इससे 47.79 लाख से ज्यादा लोगों को लाभ मिलने की बात कही गई है।
46,944 विकास कार्य पूरे, 27,032 ग्राम विकास योजनाएं तैयार
पीएम-अजय के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 46,944 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा, गांवों के समग्र विकास के लिए 27,032 ग्राम विकास योजनाएं (वीडीपी) तैयार की गई हैं।
योजना का प्रमुख उद्देश्य अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे और जरूरी सेवाओं की कमियों को दूर करना है। इसके तहत गांवों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने और निवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने पर जोर दिया जाता है।
क्या है आदर्श ग्राम की अवधारणा?
आदर्श ग्राम का उद्देश्य ऐसे गांवों का विकास करना है, जहां लोगों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों और उनकी न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी हो सकें। इस अवधारणा में विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच मौजूद असमानताओं को कम करने और विकास के लाभों को अधिक व्यापक बनाने पर भी ध्यान दिया जाता है।
योजना के तीन प्रमुख घटक
पीएम-अजय को तीन मुख्य हिस्सों में लागू किया जाता है। इनमें अनुसूचित जाति बहुल गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करना, राज्य और जिला स्तर पर सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए अनुदान देना तथा छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत शामिल है।
मंत्रालय के अनुसार, सितंबर 2026 तक योजना के अंतर्गत 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका था। इससे विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों को बढ़ावा मिला है।
दो छात्रावास परियोजनाओं के लिए 61.46 करोड़ रुपये
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने दो छात्रावास परियोजनाओं के संबंध में 61.46 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की है। इनमें एक छात्रावास लड़कियों और दूसरा लड़कों के लिए प्रस्तावित है।
दोनों छात्रावासों को मिलाकर कुल 264 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था होगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने में सहायता देना है।
निगरानी के लिए डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप
योजना के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए मंत्रालय ने पीएम-अजय मोबाइल एप्लिकेशन और पोर्टल शुरू किया है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से कागज पर आधारित प्रक्रियाओं को ऑनलाइन प्रणाली में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
पोर्टल और ऐप के जरिए योजना से जुड़े कार्यों के निपटान और निगरानी को डिजिटल रूप देने की व्यवस्था की गई है। इससे कार्यों की प्रगति पर वास्तविक समय में नजर रखने और निगरानी प्रक्रिया को मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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