ग्रामीण विकास की रीढ़ बने जमीनी कार्यकर्ता, योजनाओं को घर-घर पहुंचाने में निभा रहे अहम भूमिका

जल जीवन मिशन, PMAY-G और NRLM जैसी योजनाओं को ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाने में सामुदायिक कैडर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जल समितियों, नल जल मित्र, आवास मित्र और स्वयं सहायता समूहों के जरिए स्थानीय स्तर पर सेवा और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

Sep 21, 2026 - 14:52
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ग्रामीण विकास की रीढ़ बने जमीनी कार्यकर्ता, योजनाओं को घर-घर पहुंचाने में निभा रहे अहम भूमिका
ग्रामीण विकास की रीढ़ बने जमीनी कार्यकर्ता, योजनाओं को घर-घर पहुंचाने में निभा रहे अहम भूमिका
ग्रामीण विकास की रीढ़ बने जमीनी कार्यकर्ता, योजनाओं को घर-घर पहुंचाने में निभा रहे अहम भूमिका

ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने में सामुदायिक कैडर और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। पानी, आवास, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक विकास से जुड़ी योजनाओं में ये कार्यकर्ता ग्रामीण परिवारों को जानकारी देने के साथ-साथ दस्तावेजीकरण, आवेदन, सत्यापन और सेवाओं तक पहुंच बनाने में भी सहायता करते हैं।

इन सामुदायिक संस्थाओं का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों को अलग-अलग सरकारी कार्यक्रमों से जोड़कर उनकी जरूरतों के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराना भी है। हालिया रिपोर्ट में जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी पहलों में ऐसे कार्यकर्ताओं की भूमिका को रेखांकित किया गया है।

जल समितियों में महिलाओं की अहम भागीदारी

जल जीवन मिशन के तहत गांवों में विलेज वाटर एंड सैनिटेशन कमेटी (VWSC) या पानी समितियों को स्थानीय जल आपूर्ति व्यवस्था के संचालन और रखरखाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इन समितियों का गठन ग्राम सभा के माध्यम से किया जाता है और इनमें महिलाओं की कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी का प्रावधान है।

समितियां जल व्यवस्था के संचालन, बैंक खातों, उपयोगकर्ता शुल्क, बजट और रखरखाव जैसे कार्यों में सहयोग करती हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देशभर में 5.33 लाख से अधिक VWSC/पानी समितियां काम कर रही हैं।

‘नल जल मित्र’ से गांवों में तकनीकी मदद

नल जल मित्र कार्यक्रम के तहत समुदाय के लोगों को प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल काम और पंप संचालन जैसे तकनीकी कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य गांवों में पेयजल प्रणालियों के संचालन और छोटी-मोटी तकनीकी खराबियों के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर क्षमता विकसित करना है।

इससे ग्रामीण जल आपूर्ति व्यवस्था के रखरखाव के लिए हर छोटी समस्या में बाहरी तकनीकी सहायता पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

आवास मित्र कर रहे लाभार्थियों की मदद

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) में आवास मित्र लाभार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराते हैं। पात्र परिवार की पहचान और दस्तावेजीकरण से लेकर निर्माण की निगरानी और घर पूरा होने तक वे लाभार्थियों के साथ समन्वय करते हैं।

सरकार ने PMAY-G के तहत मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ ग्रामीण घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर लाभार्थियों को मार्गदर्शन देने वाले कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

सुमति देबबर्मा ने पूरा किया पक्के घर का सपना

पश्चिम त्रिपुरा के मोहनपुर ब्लॉक की रंगचेरा ग्राम पंचायत की सुमति देबबर्मा की कहानी सामुदायिक सहायता की भूमिका को दिखाती है। वह अपनी बेटी के साथ एक जर्जर कच्चे मकान में रहती थीं। कमजोर छत, मिट्टी के फर्श और कमजोर दीवारों के कारण बारिश के मौसम में उनकी परेशानियां बढ़ जाती थीं।

आवास मित्र की सहायता से उन्हें PMAY-G के तहत वित्तीय सहायता मिली और उन्होंने 2022 में अपना पक्का घर पूरा किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार उन्हें निर्माण की प्रगति और जियो-टैगिंग से जुड़े प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से तीन किस्तों में 1.30 लाख रुपये मिले। आवास मित्र ने दस्तावेजीकरण, निर्माण की निगरानी और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में उनकी मदद की।

एक परिवार को कई योजनाओं से जोड़ने पर जोर

सामुदायिक कैडर का काम किसी एक योजना तक सीमित नहीं रहता। उनका नेटवर्क पात्र लाभार्थियों की पहचान, दस्तावेज तैयार कराने, सत्यापन, बैंक खाते से जोड़ने और सरकारी सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद करता है।

घरेलू स्तर पर योजनाओं के अभिसरण का उद्देश्य परिवारों को आजीविका, स्वास्थ्य, स्वच्छता और वित्तीय समावेशन जैसे विकास के अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़ना है। इस प्रक्रिया में आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य और पोषण जागरूकता के साथ स्वच्छता जैसे विषयों पर भी सहयोग करती हैं।

वहीं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े जेंडर कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन समुदायों के साथ लैंगिक हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और असमानता जैसे मुद्दों पर काम करते हैं।

आरती ने सामुदायिक नेतृत्व की बनाई पहचान

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की थनवा मुडियारी ग्राम पंचायत की आरती का सफर भी सामुदायिक संस्थाओं के जरिए ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व को सामने लाता है।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली आरती वर्ष 2016 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। आगे चलकर उन्होंने स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर स्तरीय महासंघ में पदाधिकारी की जिम्मेदारी संभाली। बाद में वह PRI-CBO अभिसरण परियोजना के तहत अभिसरण सामुदायिक संसाधन व्यक्ति बनीं।

उन्होंने ग्रामीणों को संगठित करने, साप्ताहिक बाजार शुरू कराने और पंचायत, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं तथा ग्रामीण परिवारों के बीच समन्वय मजबूत करने में भूमिका निभाई।

प्रशिक्षण को बनाया गया निरंतर प्रक्रिया

सामुदायिक कैडर की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण को एक बार की गतिविधि के बजाय निरंतर प्रक्रिया के रूप में विकसित किया गया है। इसमें शुरुआती प्रशिक्षण, विषय आधारित मॉड्यूल, रिफ्रेशर कोर्स, फील्ड मार्गदर्शन और मौके पर सहायता शामिल है।

NRLM के तहत कृषि सखी, पशु सखी, मत्स्य सखी और CRP-EP जैसे विभिन्न सामुदायिक कैडर विकसित किए गए हैं। इसी तरह आशा कार्यकर्ताओं, स्वच्छाग्रहियों, जल समितियों, जल सखियों और आवास मित्रों के लिए उनकी जिम्मेदारियों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है।

ग्रामीण परिवर्तन में अहम कड़ी

सामुदायिक कैडर सरकारी योजनाओं और ग्रामीण परिवारों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहे हैं। जागरूकता, सेवा सहायता, क्षमता निर्माण, व्यवहार परिवर्तन और योजनाओं के अभिसरण के जरिए ये कार्यकर्ता सरकारी कार्यक्रमों को स्थानीय जरूरतों से जोड़ने में मदद करते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा वितरण और सामाजिक-आर्थिक विकास को मजबूत करने के लिए इन जमीनी कार्यकर्ताओं की क्षमता में निरंतर निवेश महत्वपूर्ण रहेगा। पानी, आवास, स्वास्थ्य, आजीविका और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में उनकी भूमिका ग्रामीण परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक स्थानीय और सहभागी बनाने में मदद करती है।

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