शिवराज चौहान ने की कृषि मंत्रालय की समीक्षा, किसान योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचाने पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में मंत्रालय की समग्र मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में Farmer ID, प्राकृतिक खेती, दलहन-तिलहन, बागवानी, फसल बीमा, कृषि अवसंरचना और किसान कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली के कृषि भवन में कृषि मंत्रालय की समग्र मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें मंत्रालय के विभिन्न विभागों, प्रभागों और राष्ट्रीय मिशनों के कामकाज तथा योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया गया।
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों और रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। योजनाओं का वास्तविक असर किसानों के जीवन में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने वित्तीय और भौतिक लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने तथा धीमी गति से चल रहे कार्यों में तेजी लाने को कहा। सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र में नियमित समीक्षा और जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभाव पर जोर पहले भी दिया जाता रहा है।
10.77 करोड़ से अधिक Farmer ID तैयार
समीक्षा के दौरान डिजिटल कृषि व्यवस्था की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। 14 करोड़ किसानों को डिजिटल रूप से जोड़ने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 10.77 करोड़ से अधिक Farmer ID बनाए जाने की जानकारी दी गई। इस डिजिटल पहचान के जरिए किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, कृषि ऋण, फसल बीमा और अन्य सेवाओं का लाभ अधिक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
जिन राज्यों में Farmer ID बनाने की गति अपेक्षाकृत कम है, वहां विशेष अभियान और कैंप आयोजित कर किसानों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया।
‘खेत बचाओ अभियान’ पर जोर
बैठक में मिट्टी की गुणवत्ता, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल और कृषि अवशेष प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को ‘खेत बचाओ अभियान’ को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
इस अभियान का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में जागरूक करना है। कृषि मंत्रालय इससे पहले भी अभियान के दौरान KVKs, ICAR संस्थानों और राज्य कृषि तंत्र को किसानों तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने से जोड़ चुका है।
दलहन और तिलहन उत्पादन में उपलब्धि
राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की समीक्षा में बताया गया कि 2025-26 में दलहन उत्पादन 266 लाख टन के लक्ष्य से बढ़कर 274.09 लाख टन रहा। दलहन की बुआई का क्षेत्र भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा।
इसी तरह खाद्य तेल-तिलहन मिशन के तहत 427 लाख टन के लक्ष्य की तुलना में 430.59 लाख टन तिलहन उत्पादन दर्ज किया गया। बैठक में इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए दालों और खाद्य तेलों के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में लगातार काम करने पर जोर दिया गया। कृषि मंत्रालय पहले भी दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रख चुका है।
प्राकृतिक खेती से लाखों किसान जुड़े
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अब तक 27.32 लाख किसानों और 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती से जोड़ने की जानकारी बैठक में दी गई।
वर्ष 2025-26 के दौरान निर्धारित लक्ष्य से अधिक किसानों और कृषि क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने का दावा किया गया। किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए कृषि सखियों और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
बागवानी और FPO पर भी समीक्षा
मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत बागवानी उत्पादन 360 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 370.84 मिलियन टन तक पहुंचने की जानकारी दी गई। नए पौधशालाओं और नए बाग क्षेत्र के विकास में भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि दर्ज होने की बात कही गई।
10,000 FPO योजना के तहत भी किसानों की भागीदारी बढ़ी है। समीक्षा में बताया गया कि 30.11 लाख किसान अब तक किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े हैं।
PM-RKVY के तहत 664 परियोजनाओं को मंजूरी
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी PM-RKVY के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 664 नई परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई। इनमें प्रयोगशालाओं, गोदामों, कस्टम हायरिंग सेंटर और बीज उत्पादन से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
कुल 8,550 करोड़ रुपये के आवंटन के मुकाबले 3,151.80 करोड़ रुपये की प्रगति दर्ज होने की बात कही गई। मंत्री ने राज्यों को कृषि विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
AIF से कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
कृषि अवसंरचना कोष यानी AIF के तहत 2.25 लाख से अधिक परियोजनाओं के लिए 1.01 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के ऋण स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई। इन परियोजनाओं में वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसे ढांचे शामिल हैं।
इसके साथ ही एग्री-स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए AgriSURE फंड के तहत वित्तीय प्रतिबद्धताओं की भी समीक्षा की गई।
फसल बीमा में बढ़ा किसानों का नामांकन
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के नामांकन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले खरीफ सीजन के 2.30 करोड़ के मुकाबले मौजूदा खरीफ में 2.83 करोड़ किसानों के नामांकन की जानकारी दी गई।
बैठक में मंत्री ने फसल बीमा दावों के निपटारे को पारदर्शी और समयबद्ध रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि पात्र किसानों के दावे अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।
KVK, कृषि विश्वविद्यालय और ‘आत्मा’ के बीच बेहतर तालमेल
कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी यानी ‘आत्मा’ के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
मंत्री ने वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के खेत के बीच की दूरी कम करने की जरूरत बताई। कृषि मंत्रालय पहले भी KVKs, कृषि विश्वविद्यालयों और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर तालमेल को कृषि तकनीक किसानों तक पहुंचाने के लिए जरूरी बता चुका है।
मखाना और अन्य मिशनों की समीक्षा
मखाना विकास मिशन के तहत किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की जानकारी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा राष्ट्रीय बांस मिशन, मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन, कपास उत्पादन और पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैविक मूल्य संवर्धन से जुड़ी योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
मखाना किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को व्यापक बनाने और प्रशिक्षण की गुणवत्ता की जमीनी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।
धीमी प्रगति वाले जिलों पर निगरानी
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जिलों की प्रगति का भी आकलन किया गया। 74 आउटपुट इंडिकेटर्स के आधार पर तैयार जिला रैंकिंग में देश का औसत स्कोर अप्रैल के 18.85 से बढ़कर अगस्त में 46.89 होने की जानकारी दी गई।
लगातार कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फील्ड विजिट पर रहेगा जोर
शिवराज सिंह चौहान ने वरिष्ठ अधिकारियों और मिशन निदेशकों से केवल कागजी रिपोर्टों के आधार पर योजनाओं की समीक्षा करने के बजाय फील्ड में जाकर स्थिति देखने को कहा। प्राकृतिक खेती, मखाना प्रशिक्षण, Soil Health Card, किसान मेलों और डिजिटल कृषि योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का आकलन करने पर जोर दिया गया।
उन्होंने पीएम-किसान में सभी पात्र किसानों को जोड़ने, अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने, PM-AASHA के तहत खरीद की निगरानी और फसल बीमा दावों के समयबद्ध निपटारे के निर्देश भी दिए।
बैठक के दौरान यह संदेश दिया गया कि कृषि योजनाओं की नियमित समीक्षा का उद्देश्य केवल लक्ष्य और आंकड़ों की निगरानी करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचने वाले किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचे।
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