PMGSY चिंतन शिविर में शिवराज का बड़ा संदेश, सड़क निर्माण के साथ गुणवत्ता और रखरखाव पर जोर

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने PMGSY के राष्ट्रीय चिंतन शिविर में ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता, समय पर निर्माण और लंबे समय तक रखरखाव पर जोर दिया। उन्होंने लापरवाही करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी।

Oct 05, 2026 - 17:11
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PMGSY चिंतन शिविर में शिवराज का बड़ा संदेश, सड़क निर्माण के साथ गुणवत्ता और रखरखाव पर जोर

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) को केवल सड़क निर्माण की योजना के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और जीवन स्तर में सुधार का माध्यम बनाने पर जोर दिया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए उन्होंने अधिकारियों और अभियंताओं से कहा कि शिविर को महज औपचारिक आयोजन न बनाया जाए, बल्कि गांवों की वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक और नए समाधान तलाशे जाएं।

शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्माण में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा।

ग्रामीण विकास की बुनियाद है बेहतर सड़क संपर्क

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए गांवों का मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने अपने बचपन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि गांव से भोपाल जाने के दौरान उन्हें कभी पगडंडियों और कीचड़ भरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था। सड़क संपर्क के अभाव में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में भी ग्रामीणों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि PMGSY ने ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इससे ग्रामीण जीवन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था में बदलाव आया है।

8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण

चौहान ने बताया कि देश में अब तक लगभग 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि PMGSY के चौथे चरण में करीब 62 हजार किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से लगभग 20 हजार किलोमीटर सड़कों को मंजूरी मिल चुकी है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने पर ध्यान देने को कहा।

72 दिन की समय सीमा का पालन जरूरी

परियोजनाओं में देरी को लेकर केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क परियोजना की स्वीकृति से निर्माण शुरू होने तक निर्धारित 72 दिनों की समय सीमा का पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने बार-बार टेंडर रद्द होने या पर्याप्त बोली नहीं आने जैसी समस्याओं से बचने के लिए पहले से बेहतर तैयारी करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, देरी से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ने के साथ परियोजनाएं भी लंबे समय तक अटक सकती हैं।

वन मंजूरियों में तेजी लाने के निर्देश

वन और पर्यावरण संबंधी मंजूरियों में देरी पर चौहान ने अधिकारियों से केवल पत्राचार तक सीमित नहीं रहने को कहा। उन्होंने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के साथ सीधे समन्वय कर लंबित मामलों का समाधान करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सक्रियता दिखानी चाहिए और लंबित मामलों के निपटारे पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

स्थानीय जरूरत के हिसाब से तैयार हो DPR

बाढ़, भारी बारिश और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि देश के सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसा इंजीनियरिंग मॉडल उपयुक्त नहीं हो सकता। सड़क की DPR यानी Detailed Project Report तैयार करते समय स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन जरूरी है।

उन्होंने सड़क निर्माण के साथ उचित जल निकासी, पुलिया और जलभराव की समस्या को ध्यान में रखने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि ऐसी सड़क जिसका पानी आसपास के घरों में भर जाए, वह अपने उद्देश्य को पूरा नहीं करती।

खराब गुणवत्ता पर होगी कार्रवाई

शिवराज सिंह चौहान ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने खराब काम करने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि प्रतिबंधित ठेकेदार किसी दूसरे नाम या नई कंपनी के जरिए दोबारा सरकारी काम हासिल न कर सकें।

उन्होंने अधिकारियों से नियमित फील्ड विजिट और औचक निरीक्षण करने को कहा, ताकि निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन किया जा सके।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहन

चौहान ने PMGSY के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के काम की सराहना की। गुणवत्ता के क्षेत्र में गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान का उल्लेख किया गया। वहीं सड़क रखरखाव में पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के प्रदर्शन को बेहतर बताया गया।

नई तकनीक Full Depth Reclamation (FDR) के इस्तेमाल में उत्तर प्रदेश के काम की सराहना की गई। इसके अलावा असम में संपत्तियों की QR कोडिंग से जुड़े प्रयोग को भी उल्लेखनीय बताया गया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ परियोजनाएं पूरी करने वाले राज्यों को भविष्य की स्वीकृतियों में प्राथमिकता या अतिरिक्त महत्व दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सम्मानित करने की भी बात कही गई।

सड़क बनने के बाद रखरखाव भी जरूरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क का निर्माण पूरा हो जाना अंतिम लक्ष्य नहीं है। सड़क के पूरे जीवनकाल के दौरान उसकी देखभाल और रखरखाव पर भी ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि PMGSY के तहत शुरुआती पांच वर्षों में संबंधित एजेंसी पर रखरखाव की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने छोटे गड्ढों और शुरुआती नुकसान की समय रहते मरम्मत करने पर जोर दिया, ताकि बाद में बड़ी समस्या न बने।

साथ ही पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद भी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई।

PM JANMAN के तहत दूरदराज इलाकों में तेजी से सड़क निर्माण

चौहान ने PM JANMAN योजना के तहत दूरदराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्य तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, झारखंड और आंध्र प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों का विशेष रूप से उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन इलाकों में सड़क निर्माण का उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना नहीं है, बल्कि दूरस्थ समुदायों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ना भी है।

‘कंस्ट्रक्शन से कनेक्टिविटी, कनेक्टिविटी से कंटिन्यूटी और कंटिन्यूटी से कम्युनिटी’

चिंतन शिविर में चौहान ने PMGSY के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण का अंतिम उद्देश्य केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि लगातार बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और उसके माध्यम से ग्रामीण समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों और अभियंताओं से पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर नए, व्यावहारिक और नवाचारपूर्ण सुझाव देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अच्छे सुझावों को नीति निर्माण में शामिल किया जा सकता है।

कार्यक्रम में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, मुख्य अभियंता और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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