Trump Iran War: ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, समझौता नहीं हुआ तो बढ़ेगा सैन्य दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया। इसी बीच न्यूयॉर्क में मध्यस्थों के जरिए अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य अहम मुद्दा रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि युद्ध खत्म करने के लिए समझौता नहीं होता है तो अमेरिका के सामने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने का विकल्प मौजूद है। हालांकि, इसी बीच न्यूयॉर्क में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत भी हुई, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावना बनी हुई है।
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के मामले में उनके सामने एक बड़ा फैसला है। उनके अनुसार, एक रास्ता ऐसा समझौता है जिसके जरिए ईरान दोबारा अपनी अर्थव्यवस्था और ताकत को खड़ा कर सकता है, जबकि दूसरा रास्ता उसके खिलाफ और कठोर कार्रवाई का है।
ट्रंप के बयान के बाद ईरानी पक्ष ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के दबाव को खारिज करते हुए कहा कि उनका देश सैन्य कार्रवाई की स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने भी कहा कि तेहरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
न्यूयॉर्क में बातचीत का रास्ता खुला
कड़े बयानों के बीच मंगलवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच न्यूयॉर्क में मध्यस्थों के जरिए कई घंटे तक संपर्क हुआ। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की ईरानी प्रतिनिधियों के साथ करीब तीन घंटे की बातचीत हुई। विटकॉफ ने बातचीत को रचनात्मक और उम्मीद जगाने वाला बताया। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच सीधे आमने-सामने बातचीत हुई या नहीं, इसको लेकर रिपोर्टों में अंतर है।
ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात की। इस दौरान तेहरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से जुड़ी शर्तें अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाई गईं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा
बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति प्रमुख मुद्दों में शामिल रही है। ईरान की ओर से संकेत दिया गया है कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों से जुड़ी पाबंदियां हटाता है तो समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने पर विचार किया जा सकता है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ट्रंप ने खाड़ी देशों के नेताओं के साथ भी बैठक की। क्षेत्रीय देशों के लिए समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता इस पूरे संकट के अहम मुद्दे बने हुए हैं।
कूटनीति और सैन्य दबाव के बीच बढ़ा तनाव
लगभग सात महीने से चले आ रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच दोनों पक्षों के बयानों में सैन्य दबाव और बातचीत, दोनों के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि उन्हें समझौते की संभावना नजर आती है और चुनाव के बाद किसी समझौते की उम्मीद जताई है। दूसरी ओर, ईरान ने बातचीत के लिए अपनी शर्तों को सामने रखा है।
क्षेत्रीय स्तर पर यमन में ईरान समर्थित हूती समूह की गतिविधियां भी तनाव बढ़ा रही हैं। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बनी हुई है।
इस बीच, सऊदी अरब ने लाल सागर के रास्ते तेल निर्यात के विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। होर्मुज मार्ग में व्यवधान की स्थिति में वैकल्पिक निर्यात मार्ग क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
What's Your Reaction?
Like
1
Dislike
0
Love
1
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)