Bihar Flood 2026: गंडक का रिकॉर्ड जलस्तर, तटबंधों पर बढ़ा दबाव

नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर बगहा में रिकॉर्ड 91.25 मीटर पहुंच गया। तटबंधों पर दबाव और नुकसान के बीच बिहार के कई जिलों में निगरानी और राहत अभियान तेज किया गया है।

Sep 29, 2026 - 12:48
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Bihar Flood 2026: गंडक का रिकॉर्ड जलस्तर, तटबंधों पर बढ़ा दबाव

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में कम समय में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में फ्लैश फ्लड की स्थिति ने बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 28 सितंबर की सुबह करीब 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में नदी के जलस्तर पर दबाव बढ़ा।

बगहा में गंडक ने बनाया नया रिकॉर्ड

गंडक नदी का जलस्तर पश्चिम चंपारण के बगहा गेज स्टेशन पर 91.25 मीटर तक पहुंच गया। यह 2024 में दर्ज 90.90 मीटर के पिछले उच्चतम स्तर से 0.35 मीटर ज्यादा है। अधिकारियों के अनुसार, बराज से छोड़ा गया अधिकतम पानी 2024 के रिकॉर्ड से कम था, लेकिन लगातार उच्च जलप्रवाह और स्थानीय बारिश ने डाउनस्ट्रीम जलस्तर को प्रभावित किया।

बिहार के आधिकारिक रियल-टाइम डेटा में भी 29 सितंबर की सुबह बगहा और पश्चिम चंपारण के कई गेज स्टेशनों पर गंडक का जलस्तर उच्च स्तर पर दर्ज किया गया।

तटबंधों पर सीपेज और ओवरटॉपिंग का खतरा

लगातार तेज बहाव के कारण कई स्थानों पर तटबंधों पर सीपेज, पाइपिंग और ओवरटॉपिंग की स्थिति सामने आई। विभाग के अनुसार, करीब 169 संवेदनशील स्थानों पर तत्काल कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।

हालांकि, पश्चिम चंपारण में चंपारण तटबंध को दो स्थानों पर नुकसान पहुंचा। खैरटवा और फुलियाखाड़ क्षेत्र में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भी गंडक के दाहिने तटबंध को नुकसान की खबर सामने आई है।

कई जिलों में बाढ़ का असर

गंडक का पानी पश्चिम चंपारण के कई इलाकों में फैल गया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बगहा समेत नौ प्रखंडों के गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचा है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है और राहत शिविर तथा सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं।

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पश्चिम चंपारण के अलावा पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे जिलों में भी निगरानी बढ़ाई है। बिहार सरकार के अधिकारियों को निचले और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

इंजीनियरों की टीम तटबंधों पर तैनात

जल संसाधन विभाग ने स्थिति को देखते हुए कई इंजीनियरिंग टीमों को संवेदनशील इलाकों में भेजा है। अधिकारी तटबंधों की निगरानी के साथ-साथ जहां जरूरत है, वहां मरम्मत और बाढ़-संघर्ष से जुड़े काम कर रहे हैं।

वहीं, बराज से पानी का प्रवाह चरम के बाद घटने लगा है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक इसका असर डाउनस्ट्रीम इलाकों में कुछ समय तक बना रह सकता है। इसी वजह से तटबंधों और निचले इलाकों में निगरानी जारी रखी गई है।

राहत और बचाव पर प्रशासन की नजर

बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और बचाव व्यवस्था सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में SDRF और अन्य राहत एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए प्रशासन की नजर अब डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर है। आने वाले समय में नदी का पानी घटने की गति और तटबंधों की स्थिति बाढ़ के प्रभाव को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण रहेगी।

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