CSIR Foundation Day 2026: 85 साल का हुआ सीएसआईआर, विज्ञान और तकनीकी अनुसंधान में निभा रहा अहम भूमिका
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) 26 सितंबर 2026 को अपना 85वां स्थापना दिवस मनाएगा। जानें CSIR की स्थापना, अनुसंधान नेटवर्क, प्रमुख वैज्ञानिक क्षेत्र और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में इसकी भूमिका।
नई दिल्ली: वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद यानी CSIR 26 सितंबर 2026 को अपना 85वां स्थापना दिवस मनाएगा। 26 सितंबर 1942 को स्थापित यह संस्थान भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने वाले प्रमुख संगठनों में शामिल है। स्थापना दिवस के अवसर पर वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के योगदान को याद करने के साथ युवाओं और विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
CSIR के स्थापना दिवस से जुड़े कार्यक्रमों में आम जनता और विद्यार्थियों को वैज्ञानिक गतिविधियों से परिचित कराने के लिए प्रयोगशालाओं में ओपन डे जैसी पहल भी शामिल होती है। उदाहरण के तौर पर चेन्नई के CSIR कैंपस में 28 सितंबर को ओपन डे आयोजित किया जाएगा, जहां लोग प्रयोगशालाओं की अनुसंधान सुविधाओं और तकनीकी परियोजनाओं को करीब से देख सकेंगे।
देशभर में फैला CSIR का अनुसंधान नेटवर्क
CSIR का देशभर में व्यापक अनुसंधान नेटवर्क है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसके नेटवर्क में 37 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, 39 आउटरीच सेंटर, एक इनोवेशन कॉम्प्लेक्स और तीन यूनिट शामिल हैं। संगठन विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास गतिविधियां संचालित करता है।
CSIR के अनुसंधान का दायरा समुद्र विज्ञान, भू-भौतिकी, रसायन विज्ञान, दवाओं, जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और नैनो टेक्नोलॉजी से लेकर खनन, एयरोनॉटिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन, पर्यावरण इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी तक फैला हुआ है।
समाज और देश की जरूरतों से जुड़ा अनुसंधान
CSIR की तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल पर्यावरण, स्वास्थ्य, पेयजल, भोजन, आवास और ऊर्जा जैसे सामाजिक महत्व के क्षेत्रों में भी किया जाता है। इसके अलावा कृषि तथा गैर-कृषि क्षेत्रों से जुड़े समाधान विकसित करने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए मानव संसाधन तैयार करने में भी परिषद की भूमिका है।
CSIR का स्थापना दिवस देश में वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के महत्व को सामने लाने का अवसर भी है। इस मौके पर विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को विज्ञान के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए नए समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया जाता है।
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