नौसेना को मिला पहला फ्लीट सपोर्ट शिप FSS-1, राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में किया लॉन्च

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पहले फ्लीट सपोर्ट शिप FSS-1 को लॉन्च किया। 43,500 टन क्षमता वाला यह पोत समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, पानी और जरूरी रसद उपलब्ध कराकर उनकी अभियान क्षमता बढ़ाएगा।

Oct 06, 2026 - 12:07
0 0
नौसेना को मिला पहला फ्लीट सपोर्ट शिप FSS-1, राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में किया लॉन्च

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में भारतीय नौसेना के पहले फ्लीट सपोर्ट शिप FSS-1 को लॉन्च किया। करीब 43,500 टन क्षमता वाले इस पोत को समुद्र में तैनात युद्धपोतों को आवश्यक ईंधन और अन्य रसद उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। इससे नौसेना के जहाजों को बार-बार ईंधन और जरूरी सामान लेने के लिए बंदरगाह लौटने की आवश्यकता कम होगी।

फ्लीट सपोर्ट शिप समुद्र में नौसेना के लिए एक तरह के चलते-फिरते लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में काम करता है। इसके जरिए युद्धपोतों को समुद्र में ही ईंधन, पानी, गोला-बारूद और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति की जा सकती है। इससे लंबे समुद्री अभियानों के दौरान नौसेना की परिचालन क्षमता और पहुंच को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

हिंदुस्तान शिपयार्ड ने किया निर्माण

FSS-1 का निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। यह भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पांच फ्लीट सपोर्ट शिप की श्रृंखला का पहला पोत है। रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2023 में लगभग 19,000 करोड़ रुपये की लागत से पांच ऐसे जहाजों के निर्माण का अनुबंध HSL के साथ किया था।

इसी कार्यक्रम के तहत राजनाथ सिंह ने पांचवें और अंतिम फ्लीट सपोर्ट शिप FSS-5 की कील भी रखी। इससे इस पूरी श्रृंखला के निर्माण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का संकेत मिला है।

बड़े जहाजों के निर्माण की क्षमता में इजाफा

कार्यक्रम के दौरान हिंदुस्तान शिपयार्ड की अपग्रेड की गई Slipway-4 और 300 टन क्षमता वाली Goliath Crane का भी उद्घाटन किया गया। PIB के मुताबिक, विस्तारित Slipway-4 और नई क्रेन की मदद से शिपयार्ड 45,000 DWT तक के बड़े और जटिल पोतों का निर्माण और लॉन्च कर सकेगा।

FSS-1 को स्टील कटिंग के करीब 18 महीने बाद पानी में उतारा गया है। यह उपलब्धि भारत की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी नौसेना की पहुंच

फ्लीट सपोर्ट शिप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि समुद्र में लंबे समय तक तैनात युद्धपोतों को जरूरी संसाधन वहीं उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे नौसेना के जहाजों की समुद्री endurance बढ़ती है और हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी अवधि के अभियानों को जारी रखना आसान होता है।

इन पोतों को जरूरत पड़ने पर मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

विशाखापत्तनम में आयोजित कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इससे पहले रक्षा मंत्री ने विशाखापत्तनम में नौसेना के जवानों और उनके परिवारों से भी मुलाकात की थी। उन्होंने समुद्री सुरक्षा में नौसेना कर्मियों की भूमिका और उनके परिवारों के योगदान की सराहना की।

अन्य सैन्य अधिकारियों की अहम मुलाकातें

इसी बीच विभिन्न राज्यों में सैन्य और नागरिक प्रशासन के बीच समन्वय से जुड़ी गतिविधियां भी हुईं। छत्तीसगढ़-ओडिशा सब एरिया के कमांडर ब्रिगेडियर आर. शंकर ने रायपुर में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की।

वहीं, पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने 5 अक्टूबर को बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की। चर्चा में कारवार नौसैनिक अड्डे के विकास, रक्षा उद्योग, नवाचार और नागरिक-सैन्य समन्वय जैसे मुद्दे शामिल रहे।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User