रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का फिर दोटूक रुख, कहा- संवाद और कूटनीति ही समाधान का रास्ता

भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक बार फिर संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ने का रास्ता बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत दोनों देशों के संपर्क में है और ब्लैक सी शिपिंग, अनाज-ऊर्जा निर्यात तथा संभावित हमलों को रोकने जैसे मुद्दों पर बातचीत कर रहा है।

Oct 08, 2026 - 08:56
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रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का फिर दोटूक रुख, कहा- संवाद और कूटनीति ही समाधान का रास्ता

रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार दोनों पक्षों के संपर्क में है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मौकों पर युद्ध समाप्त करने तथा बातचीत के जरिए समाधान खोजने की बात कह चुके हैं।

नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान जायसवाल ने कहा कि भारत का रुख लगातार यही रहा है कि संघर्ष का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।

रूस और यूक्रेन दोनों से संपर्क में भारत

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत शांति प्रयासों के तहत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संवाद बनाए हुए है। जायसवाल ने कहा कि भारत की इस भूमिका को दोनों देशों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बिश्केक में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस बातचीत में प्रधानमंत्री ने लंबे समय से जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया था।

ब्लैक सी और अनाज-ऊर्जा आपूर्ति पर बातचीत

भारत की कोशिश केवल व्यापक शांति वार्ता तक सीमित नहीं है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नई दिल्ली रूस और यूक्रेन के साथ संघर्ष से जुड़े कुछ व्यावहारिक मुद्दों पर भी बातचीत कर रही है।

इनमें ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा की आपूर्ति तथा संभावित हमलों को रोकने के विकल्प शामिल हैं। भारत का कहना है कि इन मुद्दों पर दोनों पक्षों के साथ बातचीत जारी है।

हालिया घटनाक्रम में ब्लैक सी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर भारत ने चिंता भी जताई है। नई दिल्ली ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

जयशंकर भी कर चुके हैं भारत के प्रयासों का उल्लेख

विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत के प्रयासों और दोनों पक्षों से संपर्क बनाए रखने की बात कह चुके हैं। भारत का कहना है कि वह तत्काल मानवीय और आर्थिक चिंताओं के समाधान में मददगार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

भारत पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि यदि उसकी ओर से कोई रचनात्मक योगदान संघर्ष को समाप्त करने में मदद कर सकता है, तो वह इसके लिए तैयार है।

पुतिन ने भी मोदी के प्रयासों का किया था उल्लेख

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हालिया टिप्पणियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा उठाए जाने और शांति के प्रयासों का उल्लेख किया है। वहीं, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने भी भारत के साथ शांति प्रयासों और ब्लैक सी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की बात कही है।

भारत की ओर से लगातार यही संदेश दिया जा रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तलाशा जाना चाहिए।

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