भारत की Space Economy 9 अरब डॉलर पहुंची, 440 Startup के साथ तेजी से बढ़ रहा अंतरिक्ष क्षेत्र

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। देश में Space Startups की संख्या करीब 440 हो गई है और बढ़ते निजी निवेश के चलते अगले दशक में अर्थव्यवस्था के 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

Aug 23, 2026 - 14:52
Updated: 12 days ago
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भारत की Space Economy 9 अरब डॉलर पहुंची, 440 Startup के साथ तेजी से बढ़ रहा अंतरिक्ष क्षेत्र

भारत की Space Economy ने पकड़ी रफ्तार, 9 अरब डॉलर पहुंचा बाजार; 440 स्टार्टअप सक्रिय

नई दिल्ली: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से व्यावसायिक विस्तार की ओर बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश की Space Economy का आकार करीब 9 अरब डॉलर हो चुका है। मजबूत स्टार्टअप नेटवर्क, निजी निवेश और नीतिगत बदलावों के चलते आने वाले वर्षों में इसके 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

440 के करीब पहुंची Space Startups की संख्या

भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा उछाल आया है। अगस्त 2026 तक देश में करीब 440 पंजीकृत Space Startups हो चुके हैं। वर्ष 2014 में इनकी संख्या केवल एक थी। इससे पता चलता है कि निजी कंपनियों की अंतरिक्ष क्षेत्र में दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

निजी निवेश में भी तेज वृद्धि

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी पूंजी का प्रवाह भी तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2021-22 में करीब 100.5 मिलियन डॉलर का निजी निवेश दर्ज किया गया था। यह आंकड़ा 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक लगभग 187 मिलियन डॉलर निवेश दर्ज किया गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए कुल 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके थे। इनमें 18 स्टार्टअप शामिल हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड से जुड़ी गतिविधियों और लॉन्च सेवाओं के लिए मंजूरी मिली है।

2020 के बाद निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी

भारत ने वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी के लिए रास्ता खोला था। इसके बाद कंपनियों और स्टार्टअप्स को सैटेलाइट, लॉन्च सिस्टम तथा विभिन्न Space Applications में काम करने के अवसर मिले।

Indian Space Policy 2023 ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र की अलग-अलग गतिविधियों में निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया। नीति के तहत NSIL और IN-SPACe जैसी संस्थाओं की जिम्मेदारियों को भी अधिक स्पष्ट किया गया।

NSIL के राजस्व में बड़ा उछाल

ISRO की व्यावसायिक शाखा NewSpace India Limited यानी NSIL लॉन्च, सैटेलाइट और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं से जुड़े व्यावसायिक कार्य करती है। साथ ही यह ISRO की तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाती है।

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार NSIL का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में करीब 321.77 करोड़ रुपये था। यह वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 3,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। राजस्व में यह वृद्धि भारत के Space Sector के बढ़ते व्यावसायीकरण को दर्शाती है।

IN-SPACe की भी अहम भूमिका

भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए IN-SPACe सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए कंपनियों और स्टार्टअप्स को आवश्यक सुविधाएं और अनुमति प्रक्रिया उपलब्ध कराता है।

31 जनवरी 2026 तक IN-SPACe की मदद से उद्योगों और स्टार्टअप्स को ISRO की 71 तकनीकों के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी। इससे निजी क्षेत्र को स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल और नए उत्पाद विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

Space Economy के विस्तार से भारत में नए स्टार्टअप, रोजगार और तकनीकी अवसर पैदा हो सकते हैं। निजी निवेश बढ़ने से सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च सेवाओं, संचार, पृथ्वी अवलोकन और अन्य अंतरिक्ष आधारित सेवाओं में नए कारोबार विकसित होने की संभावना है।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी संस्थानों के साथ निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी देश को वैश्विक Space Economy में एक मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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