जयशंकर का आतंकवाद पर सख्त संदेश, भारत-अमेरिका संबंधों पर जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मुंबई में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, 26/11 हमले, रक्षा सहयोग, ऊर्जा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक में शांति एवं स्थिरता पर बात की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर देते हुए आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता बताई। मुंबई में अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि उसके साझेदार भी आतंकवाद के प्रति किसी तरह की नरमी न बरतें।
कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उनकी पत्नी, अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और अन्य अधिकारी शामिल हुए। जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों में मुंबई की ऐतिहासिक और आर्थिक भूमिका को भी रेखांकित किया।
भारत-अमेरिका रिश्तों में मुंबई की अहम भूमिका
जयशंकर के मुताबिक, मुंबई और अमेरिका के बीच संबंधों का इतिहास काफी पुराना है। शुरुआती दौर में दोनों के बीच बर्फ का व्यापार होता था, जबकि आज यह जुड़ाव वित्त, कारोबार और तकनीक जैसे क्षेत्रों तक फैल चुका है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद की शिकागो यात्रा, मुंबई में जैज संगीत की लोकप्रियता और शहर में अमेरिकी कंपनियों की उपस्थिति का उल्लेख किया। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान भी कई अमेरिकियों ने समर्थन दिया था।
आजादी के बाद बुनियादी ढांचे, शिक्षा, कृषि, खाद्य क्षेत्र और तकनीक में दोनों देशों के सहयोग ने भारत के विकास में योगदान दिया। वहीं, भारतीय प्रतिभाओं ने अमेरिकी तकनीकी उद्योग को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
रक्षा, ऊर्जा और तकनीक में सहयोग का विस्तार
विदेश मंत्री ने कहा कि बीते दशकों में भारत-अमेरिका साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ा है। क्वाड (Quad), मिशन 500, पैक्स सिलिका (Pax Silica) और फोर्ज (FORGE) जैसी पहलों को उन्होंने सहयोग के महत्वपूर्ण उदाहरणों के तौर पर पेश किया।
ऊर्जा, रक्षा और नागरिक विमानन के क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में दोनों देशों के साझा हितों की पहचान करना जरूरी है। उनके अनुसार, व्यापार, निवेश, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
26/11 हमले का उल्लेख, आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख
जयशंकर ने मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमलों को याद करते हुए कहा कि इस घटना में छह अमेरिकी नागरिकों की भी मौत हुई थी। उन्होंने ताज होटल में बने 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के लिए मार्को रुबियो का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने तहव्वुर हुसैन राणा के भारत प्रत्यर्पण के अमेरिकी प्रशासन के फैसले का भी स्वागत किया। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद से अपनी रक्षा करने के अधिकार को लेकर प्रतिबद्ध है और अपने साझेदारों से भी इसी तरह के सख्त रुख की अपेक्षा करता है।
इंडो-पैसिफिक में स्थिरता साझा प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के हित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने से जुड़े हैं। नियमित संवाद और साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है।
अपने संबोधन के अंत में जयशंकर ने अमेरिका को स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएं दीं और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
तथ्य-जांच नोट: प्रकाशन से पहले मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज पहलों के आधिकारिक नाम तथा समारोह में दिए गए बयानों की मूल सरकारी विज्ञप्ति से पुष्टि कर लें।
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