UNGA 2026: जयशंकर ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ भारत आत्मरक्षा के अधिकार का करेगा इस्तेमाल
संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा और आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि देश आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि एक ऐसे पक्ष ने महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की, जो लगातार आतंकवाद से जुड़ा रहा है।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने या उसके परिणामों से बचने के तर्क स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद और सामान्य संबंधों को एक साथ आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
राज्य प्रायोजित आतंकवाद पर सख्त रुख
विदेश मंत्री ने सीमा पार उद्देश्य से किए जाने वाले राज्य प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जयशंकर ने आतंकवाद के वित्तपोषण के स्रोतों को उजागर करने और उन्हें रोकने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
दुनिया में बढ़ते संघर्षों पर जताई चिंता
अपने व्यापक संबोधन में जयशंकर ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों और उनके वैश्विक प्रभावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युद्ध और टकराव का असर केवल संघर्ष वाले देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति और विकास पर भी पड़ता है।
उन्होंने समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिमों और वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। भारत ने समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग की बात कही है।
ग्लोबल साउथ के सामने ‘4F’ चुनौती
जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की चुनौतियों को ‘4F’ के जरिए रेखांकित किया। इसमें Food, Fuel, Fertilizer और Finance यानी खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त की सुरक्षा शामिल है।
उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, उर्वरक उपलब्धता की समस्या और बाजारों तक सीमित पहुंच का असर विकासशील देशों पर पड़ता है। उनके मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ते जोखिमों के बीच देशों को अपनी निर्भरता कम करने और साझेदारियों में विविधता लाने की जरूरत है।
भारत के विकास मॉडल और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र
विदेश मंत्री ने भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को सामाजिक और आर्थिक लाभ पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभव और तकनीकी क्षमताओं को अन्य विकासशील देशों के साथ साझा कर रहा है।
उन्होंने विकास सहयोग के तहत विभिन्न देशों में चल रही भारतीय परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
आपदा प्रभावित देशों की मदद का भी उल्लेख
जयशंकर ने भारत को संकट के समय सहायता पहुंचाने वाले देश के रूप में भी प्रस्तुत किया। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों से प्रभावित देशों को भारत की ओर से दी गई सहायता का उल्लेख किया।
उन्होंने नेपाल में आई बाढ़ और वेनेजुएला में आए भूकंप के बाद भारत की ओर से की गई समयबद्ध सहायता का उदाहरण दिया। साथ ही उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की विकास और मानवीय साझेदारी को रेखांकित किया।
विदेश मंत्री के संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति के साथ-साथ वैश्विक शांति, समुद्री सुरक्षा, विकास, तकनीक और ग्लोबल साउथ की चिंताओं को भी प्रमुखता दी गई।
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