महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में बाबा महाकाल के हुए दर्शन

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। भगवान का पंचामृत से अभिषेक किया गया और उन्हें राजा स्वरूप में सजाया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

Oct 09, 2026 - 10:57
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महाकाल भस्म आरती: राजा स्वरूप में बाबा महाकाल के हुए दर्शन

उज्जैन: श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के अवसर पर बाबा महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती संपन्न हुई। तड़के आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भस्म आरती और भगवान के विशेष श्रृंगार के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति और आस्था के माहौल में डूबा रहा।

वीरभद्र की आज्ञा के बाद खुले मंदिर के कपाट

शुक्रवार तड़के परंपरा के अनुसार भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। इसके बाद पूजा-अर्चना और श्रृंगार की प्रक्रिया शुरू हुई। मंदिर में घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए। इस दौरान ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे गूंजते रहे।

पंचामृत से किया भगवान महाकाल का अभिषेक

मंदिर के पट खुलने के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक हुआ। पूजा की परंपरा के तहत हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती की गई।

अनुष्ठान के अगले चरण में बाबा महाकाल को मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई।

राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल

भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार कर उन्हें राजा स्वरूप में सजाया गया। भगवान के इस स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। कई भक्त अपने आराध्य के दर्शन पाने के लिए पहले से ही कतारों में लगे हुए थे।

रोजाना होती है भस्म आरती

श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की विशेष धार्मिक मान्यता है। परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मंदिर में सामान्यतः प्रतिदिन सुबह करीब 4 बजे से 6 बजे के बीच यह आरती आयोजित होती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इसी आस्था के चलते देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर इस अनुष्ठान में शामिल होते हैं।

बाबा महाकाल की भस्म आरती के साथ एक बार फिर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण और शिवभक्ति के जयघोष से गूंज उठा।

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