गृह मंत्रालय की तैयारी: 12 राज्यों में 60 हजार नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण
केंद्रीय गृह मंत्रालय नागरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारतीय सेना के सहयोग से 12 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में करीब 60 हजार स्वयंसेवकों के नेटवर्क की दिशा में काम कर रहा है। पहले चरण में मास्टर प्रशिक्षकों को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और आपदा राहत कर्मियों के लिए देशव्यापी ब्रॉडबैंड संचार नेटवर्क पर सुझाव मांगे गए हैं।
केंद्र सरकार देश में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नई पहल कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय भारतीय सेना के सहयोग से 12 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में करीब 60 हजार स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत नागरिक सुरक्षा के मास्टर प्रशिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि आपात परिस्थितियों और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी बेहतर हो सके।
गृह मंत्रालय के अनुसार, इस प्रायोगिक परियोजना के पहले चरण में चयनित राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के नागरिक सुरक्षा मास्टर प्रशिक्षकों को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य नागरिक सुरक्षा से जुड़े लोगों की क्षमता बढ़ाना और आपदा या अन्य आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद शुरू हुई पहल
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में व्यक्त किए गए नागरिक सुरक्षा संबंधी दृष्टिकोण से जुड़ा है। इसमें आधुनिक प्रणालियों, नई तकनीकों और बदलती सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप एक सशक्त नागरिक सुरक्षा नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया गया था।
इसी दिशा में गृह मंत्रालय के अंतर्गत अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड महानिदेशालय ने भारतीय सेना के सहयोग से मास्टर प्रशिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है। सरकार का उद्देश्य नागरिक सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करना और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद से आपात स्थितियों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
30 लाख सुरक्षा और आपदा राहत कर्मियों के लिए संचार नेटवर्क का प्रस्ताव
नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ गृह मंत्रालय ने देशभर में समर्पित ब्रॉडबैंड पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ (PPDR) नेटवर्क विकसित करने के प्रस्ताव पर भी आम जनता और संबंधित हितधारकों से सुझाव मांगे हैं।
प्रस्तावित नेटवर्क के माध्यम से करीब 30 लाख पुलिसकर्मियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और आपदा राहत कर्मियों को आधुनिक संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच संपर्क को अधिक तेज और भरोसेमंद बनाना है।
पुश-टू-टॉक, वीडियो और डेटा सेवाएं होंगी शामिल
गृह मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, इस संचार व्यवस्था में मिशन-क्रिटिकल पुश-टू-टॉक, डेटा और वीडियो सेवाएं शामिल होंगी। इन सुविधाओं से पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन सेवाओं, चिकित्सा सेवाओं और अन्य सार्वजनिक सुरक्षा एजेंसियों को आपात स्थितियों में जानकारी साझा करने में मदद मिल सकती है।
मंत्रालय नेटवर्क के लिए एक संदर्भ आर्किटेक्चर तैयार करने की प्रक्रिया में है। इसी उद्देश्य से प्रस्तावित नेटवर्क की तकनीकी संरचना और डिजाइन को लेकर आम जनता तथा संबंधित पक्षों की राय मांगी गई है।
आपात स्थितियों में बेहतर समन्वय पर जोर
प्रस्तावित ब्रॉडबैंड नेटवर्क का मकसद देशभर में सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा राहत से जुड़ी एजेंसियों के बीच संचार व्यवस्था को मजबूत करना है। तेज सूचना आदान-प्रदान से आपदा, दुर्घटना या अन्य गंभीर परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों का समन्वय बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण और आधुनिक संचार नेटवर्क की योजना के जरिए सरकार आपात तैयारियों को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, नेटवर्क की अंतिम संरचना और इसे लागू करने से जुड़े निर्णय सुझावों तथा आगे की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होंगे।
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