पनामा नहर पर सूखे की मार, सितंबर से घटेंगे जहाजों के ट्रांजिट स्लॉट; वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ी चिंता
मध्य अमेरिका में गंभीर सूखे और अल नीनो के प्रभाव के चलते पनामा नहर में जलस्तर घट रहा है। इसके कारण पनामा कैनाल अथॉरिटी ने सितंबर 2026 से दैनिक ट्रांजिट स्लॉट कम करने का फैसला किया है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका है।
सूखे से पनामा नहर में घटेगी जहाजों की आवाजाही
मध्य अमेरिका में जारी सूखे और अल नीनो के प्रभाव का असर अब महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर दिखाई देने लगा है। पनामा नहर में जलस्तर कम होने के कारण पनामा कैनाल अथॉरिटी ने सितंबर 2026 से जहाजों के दैनिक ट्रांजिट स्लॉट घटाने का फैसला किया है।
पनामा नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला प्रमुख जलमार्ग है। इसके जरिए जहाजों को दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर केप हॉर्न के लंबे समुद्री रास्ते से बचने में मदद मिलती है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।
सितंबर से कम होंगे ट्रांजिट स्लॉट
पनामा कैनाल अथॉरिटी के अनुसार, 3 सितंबर 2026 से नियोपनामैक्स लॉक के दैनिक ट्रांजिट स्लॉट घटाकर 9 किए जाएंगे। वहीं पैनामैक्स लॉक में फिलहाल 25 जहाज प्रतिदिन गुजर सकेंगे।
इसके बाद 15 सितंबर से पैनामैक्स लॉक के दैनिक स्लॉट भी घटाकर 23 किए जाने की योजना है।
बड़े जहाजों के ड्राफ्ट पर भी पाबंदी
जलस्तर में कमी के चलते बड़े जहाजों के अधिकतम अनुमत ड्राफ्ट में भी कटौती की जा रही है। 26 अगस्त से नियोपनामैक्स लॉक के लिए अधिकतम ड्राफ्ट 48 फीट रहेगा, जबकि 3 सितंबर से इसे घटाकर 47.5 फीट किया जाएगा।
ड्राफ्ट कम होने का सीधा असर बड़े और भारी मालवाहक जहाजों पर पड़ सकता है। कुछ जहाजों को सुरक्षित रूप से नहर पार करने के लिए अपने कार्गो का वजन कम करना पड़ सकता है।
पानी की कमी बनी बड़ी चुनौती
पनामा नहर की लॉक प्रणाली के संचालन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी जरूरी होता है। नहर की जल आपूर्ति आसपास की झीलों और जलाशयों पर काफी निर्भर करती है।
लंबे समय तक बारिश कम होने और सूखे की स्थिति बनने से जलस्तर नीचे चला जाता है। ऐसे में बड़े जहाजों की आवाजाही बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
वैश्विक सप्लाई चेन पर असर की आशंका
पनामा नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित होने पर प्रतीक्षा अवधि बढ़ सकती है। इससे समुद्री माल ढुलाई की लागत पर दबाव बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है।
कंटेनर, ऊर्जा उत्पादों और अन्य महत्वपूर्ण सामान की आवाजाही पर भी इसका असर पड़ सकता है। नहर से गुजरने के लिए स्लॉट हासिल करने की लागत में भी हाल के दिनों में बढ़ोतरी देखी गई है।
आगे और प्रतिबंध संभव
पनामा कैनाल अथॉरिटी जल उपलब्धता और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है। यदि सूखे की स्थिति और गंभीर होती है तथा जलस्तर में अपेक्षित सुधार नहीं आता है, तो नहर प्रशासन भविष्य में ट्रांजिट को लेकर अतिरिक्त प्रतिबंध लागू कर सकता है।
इस तरह पनामा नहर में पानी की कमी सिर्फ क्षेत्रीय समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर दुनिया के समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है।
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