PM Modi: दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर पीएम मोदी ने किया नमन, शेयर किया पुरुषार्थ का संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने योगवासिष्ठ का संस्कृत श्लोक साझा कर प्रयास, पुरुषार्थ और सफलता के संबंध का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारतीय जनसंघ के प्रमुख विचारक और संस्थापक सदस्यों में शामिल पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचार को याद किया और सामाजिक व राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार माना। उन्होंने कहा कि अंत्योदय से जुड़ा उनका विचार आज भी जनकल्याण के लिए प्रेरणा देता है।
संस्कृत श्लोक के जरिए पुरुषार्थ का संदेश
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक सुभाषित भी साझा किया। श्लोक का भाव यह है कि व्यक्ति जितना प्रयास करता है, परिणाम भी उसी के अनुरूप प्राप्त होता है। इसमें पुरुषार्थ यानी मानवीय प्रयास को महत्वपूर्ण बताया गया है।
यह श्लोक योगवासिष्ठ के मुमुक्षुव्यवहारप्रकरण, सर्ग 6 के श्लोक 2 के रूप में दर्ज है। उपलब्ध संस्कृत पाठ में भी यही श्लोक इस क्रम में मिलता है।
दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को किया याद
प्रधानमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय को राष्ट्रसेवा से जुड़े व्यक्तित्व के रूप में याद करते हुए उनके विचारों और आदर्शों को अपनाने की बात कही। उनके संदेश में सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति संकल्प दोहराने का आह्वान किया गया।
एक दिन पहले भी साझा किया था संस्कृत सुभाषित
इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने एक अन्य संस्कृत सुभाषित साझा किया था, जिसमें सत्य, प्रिय और हितकारी वाणी के महत्व पर जोर दिया गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार उस संदेश में ऐसी वाणी की बात कही गई थी जो किसी के मन में अशांति पैदा न करे और स्वाध्याय व चिंतन के जरिए वाणी को सार्थक बनाए।
इस तरह प्रधानमंत्री के लगातार साझा किए गए संस्कृत सुभाषितों में प्रयास, अनुशासन, विचारपूर्ण वाणी और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर संदेश सामने आया है।
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