पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भविष्य की तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करे भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में Emerging Science, Technology and Innovation Conclave 2026 का उद्घाटन किया। उन्होंने भारत को भविष्य की तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व दिलाने, वैज्ञानिक अनुसंधान बढ़ाने और एआई के जवाबों की सत्यता जांचने की जरूरत पर जोर दिया। संबोधन में परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर, पेटेंट फाइलिंग और शोध निवेश से जुड़ी उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।

Oct 28, 2026 - 09:32
0 0
पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भविष्य की तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करे भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विकसित भारत के निर्माण की नींव वैज्ञानिक अनुसंधान, नई खोजों और नवाचार पर आधारित होगी। मंगलवार, 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘उभरता विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन 2026’ (ESTIC 2026) का उद्घाटन करते हुए उन्होंने भारत को भविष्य की तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करने वाला देश बनाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल दूसरे देशों की तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी मौलिक खोजों और स्वदेशी समाधानों के जरिए वैश्विक चुनौतियों का समाधान भी देना चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता, मजबूत शोध व्यवस्था और युवाओं की नवाचार क्षमता को देश के भविष्य के लिए अहम बताया।

युवाओं की सोच और आत्मविश्वास की सराहना

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन के दौरान स्टार्टअप संस्थापकों के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए भारतीय युवाओं की व्यापक सोच और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवा जिस आत्मविश्वास के साथ बड़े लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं, वह देश के लिए उत्साहजनक है।

उन्होंने पिछले सम्मेलन में अपनी भागीदारी को याद करते हुए कहा कि भारत की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले देश विदेशों में विकसित तकनीकों को अपनाने और उनमें सुधार करने पर अधिक निर्भर था, लेकिन अब भारत खुद नई तकनीकें विकसित करने और वैश्विक स्तर पर दिशा तय करने की महत्वाकांक्षा रखता है।

कोविड वैक्सीन से अंतरिक्ष तक भारत की उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन, मंगल मिशन और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत को नई तकनीकों के इस्तेमाल के साथ-साथ उनके विकास में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने प्राचीन भारत की वैज्ञानिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि शून्य, संख्या प्रणाली और खगोल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में देश का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मदद से इस विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा को विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए स्वदेशी तकनीक की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए परमाणु ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करना आवश्यक है।

उन्होंने भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की उपलब्धि का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, स्वदेशी 500 मेगावाट क्षमता वाले इस रिएक्टर ने सफलतापूर्वक पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की। यह उपलब्धि देश की परमाणु ऊर्जा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अंतरिक्ष, एआई और सेमीकंडक्टर में बढ़ती क्षमता

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और बैटरी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है। उन्होंने स्वदेशी रॉकेट से उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने वाले भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप और सैटेलाइट डॉकिंग तकनीक में देश की उपलब्धियों का जिक्र किया।

उन्होंने एआई मॉडल के विकास, सेमीकंडक्टर निर्माण और घरेलू संसाधनों पर आधारित बैटरी स्टोरेज क्षमता तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा से लेकर अंतरिक्ष और एआई तक विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियां भारत के बढ़ते तकनीकी आत्मविश्वास को दर्शाती हैं। देश का लक्ष्य ऐसे समाधान तैयार करना है, जिनका इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जा सके और जो दुनिया की समस्याओं को हल करने में मदद करें।

विज्ञान का उद्देश्य आम लोगों का जीवन बेहतर बनाना

प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान और तकनीक की वास्तविक सफलता तब है, जब प्रयोगशालाओं में विकसित खोजें आम लोगों के जीवन में सुधार लाएं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, रोजगार और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक समाधानों के इस्तेमाल पर जोर दिया।

उन्होंने भारतीय स्टार्टअप के कई नवाचारों का उल्लेख किया, जिनमें मस्तिष्क की गतिविधियों को समझने वाली पहनने योग्य EEG तकनीक, स्वदेशी वायरलेस और सैटेलाइट संचार, विशेष पोषण उत्पाद, नई सेमीकंडक्टर तकनीकें और औद्योगिक कचरे के उपयोग से जुड़े समाधान शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान को मानवता की सेवा से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने ‘समाज के लिए विज्ञान’ और ‘बदलाव के लिए तकनीक’ को वैज्ञानिक प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना बताया।

आईआईटी मद्रास के ब्रेन सेंटर का उल्लेख

प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित आईआईटी मद्रास के अपने हालिया दौरे का उल्लेख करते हुए आधुनिक ब्रेन सेंटर की चर्चा की। इस केंद्र में विकसित तकनीक मानव मस्तिष्क की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार करने और जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को समझने में मदद करती है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उपलब्धियों का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वे समाज की समस्याओं को किस हद तक हल करती हैं और लोगों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाती हैं।

अनुसंधान के लिए ₹24,000 करोड़ की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की प्रगति का उल्लेख करते हुए शोध, विकास और नवाचार के लिए निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष घोषित एक लाख करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के व्यापक लक्ष्य के बीच बाजार में उपयोग के लिए तैयार प्रयोगशाला तकनीकों को आगे बढ़ाने हेतु सरकार ने 12,000 करोड़ रुपये दिए हैं।

उनके अनुसार, इसके बराबर निजी निवेशकों ने भी 12,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस तरह संबंधित शोध और विकास गतिविधियों के लिए कुल 24,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता सामने आई है।

प्रधानमंत्री ने इसे प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया।

दस साल में पेटेंट फाइलिंग बढ़कर करीब 1.5 लाख

प्रधानमंत्री ने भारत में बौद्धिक संपदा और नवाचार के बढ़ते दायरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले देश में सालाना पेटेंट आवेदन 50,000 से कम थे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या बढ़कर करीब 1.5 लाख हो गई।

उन्होंने इस बढ़ोतरी को देश में शोध और नवाचार की संस्कृति मजबूत होने का संकेत बताया। प्रधानमंत्री के अनुसार, तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग जगत और स्टार्टअप के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

एआई के जवाबों की सत्यता जांचना जरूरी

प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में वैज्ञानिक सोच और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई नियमित काम तेजी से पूरा करके उत्पादकता बढ़ा सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल स्वतंत्र सोच को सीमित करने के बजाय उसे मजबूत बनाने के लिए होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता लंबे समय तक प्रयोग करने, छोटी समस्याओं को हल करने, असफलताओं से सीखने और स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाने से विकसित होती है। एआई तेजी से जवाब दे सकती है, लेकिन उन जवाबों की सत्यता जांचने की जिम्मेदारी वैज्ञानिक की ही होनी चाहिए।

सेमीकंडक्टर से क्वांटम तकनीक तक राष्ट्रीय मिशनों की जरूरत

प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और अगली पीढ़ी के संचार जैसे क्षेत्रों में समर्पित राष्ट्रीय मिशनों पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जो वैज्ञानिकों और संस्थानों को भविष्य की चुनौतियों के लिए लगातार तैयार करे। इसके साथ ही एआई, सिंथेटिक बायोलॉजी और स्वायत्त प्रणालियों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है।

उन्होंने वित्तीय नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने उभरते साइबर खतरों का उल्लेख करते हुए एआई आधारित तथा क्वांटम सुरक्षा समाधानों के विकास पर भी जोर दिया।

शोधकर्ताओं से तीन साल का लक्ष्य तय करने की अपील

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में शामिल वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप संस्थापकों और विद्यार्थियों से अगले तीन वर्षों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रतिभागी को यह निर्धारित करना चाहिए कि वह किस तकनीक, प्रोटोटाइप, पायलट परियोजना या उत्पाद के विकास में योगदान देगा।

उन्होंने सम्मेलन को केवल विचार-विमर्श का मंच बनाने के बजाय ठोस और मापने योग्य परिणाम देने वाला मंच बनाने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत को ऐसे नवाचारों पर ध्यान देना चाहिए, जो विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएं और देश को वैश्विक समाधान केंद्र के रूप में स्थापित करें।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं में प्रतिभा और दृढ़ संकल्प की कोई कमी नहीं है। जरूरत ऐसी पीढ़ी तैयार करने की है, जो उभरते विज्ञान और प्रौद्योगिकी में केवल भागीदारी न करे, बल्कि दुनिया का नेतृत्व भी करे।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User