नेपाल में बाढ़ से बचाव की तैयारी, 6 नदी बेसिनों में चेतावनी प्रणाली

नेपाल सरकार बाढ़ और हिमनदीय झीलों के फटने से होने वाले खतरे को कम करने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रही है। छह नदी बेसिनों में बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने, चार उच्च जोखिम वाली हिमनदीय झीलों का जलस्तर कम करने और मौसम पूर्वानुमान में AI तथा मशीन लर्निंग के उपयोग को बढ़ावा देने की तैयारी है।

Oct 26, 2026 - 11:27
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नेपाल में बाढ़ से बचाव की तैयारी, 6 नदी बेसिनों में चेतावनी प्रणाली

नेपाल सरकार ने बाढ़ और हिमनदीय झीलों के फटने से होने वाले खतरे को कम करने के लिए आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई है। इसके तहत छह प्रमुख नदी बेसिनों में बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली का विस्तार किया जाएगा। साथ ही, चार संवेदनशील हिमनदीय झीलों के जलस्तर को कम करने के लिए भी परियोजना शुरू करने की तैयारी है।

सरकार की इन योजनाओं का उद्देश्य संभावित प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना और समय रहते लोगों को सतर्क करने की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

बाढ़ से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आपदा प्रबंधन को लेकर नई पहल की जा रही है। उपलब्ध कराए गए प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, इस आपदा में बड़े पैमाने पर जनहानि हुई और संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा। सरकारी प्रारंभिक रैपिड डैमेज एंड नीड्स असेसमेंट (RDNA) रिपोर्ट में आर्थिक नुकसान लगभग 1.81 अरब डॉलर आंका गया है।

भोटेकोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में बाढ़ के कारण जलविद्युत परियोजनाओं, सौर ऊर्जा संयंत्रों, बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क और परिवहन ढांचे पर असर पड़ा। ऊर्जा क्षेत्र, खासकर जलविद्युत परियोजनाएं, प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहीं। इस नुकसान ने नेपाल में बाढ़ से बचाव और आपदा के बाद पुनर्बहाली की तैयारियों की जरूरत को और रेखांकित किया है।

छह नदी बेसिनों में लगेगी बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली

नेपाल सरकार के श्वेत पत्र के अनुसार, प्रायोरिटी रिवर बेसिन फ्लड रिस्क मैनेजमेंट परियोजना के तहत छह नदी बेसिनों में बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की योजना है। यह परियोजना 2022 से 2028 तक की अवधि के लिए निर्धारित है और इसके लिए 75.4 लाख डॉलर खर्च किए जाने का उल्लेख है।

परियोजना में शामिल नदी बेसिन हैं:

- मावा-रतुवा

- बक्राहा

- लखनदेही

- ईस्ट राप्ती

- वेस्ट राप्ती

- मोहना-खुटिया

इस व्यवस्था का उद्देश्य नदी के जलस्तर और बाढ़ के जोखिम से जुड़ी जानकारी समय रहते उपलब्ध कराना है, ताकि संबंधित एजेंसियां और स्थानीय समुदाय संभावित खतरे के लिए पहले से तैयारी कर सकें।

मानसून में 24 घंटे पूर्वानुमान सेवा की योजना

नेपाल सरकार ने मानसून के दौरान बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं को लगातार उपलब्ध कराने की योजना भी घोषित की है। इसके तहत हर साल मध्य मई से मध्य अक्टूबर तक 24 घंटे पूर्वानुमान सेवाएं संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।

समय पर चेतावनी मिलने से संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करने में मदद मिल सकती है।

चार हिमनदीय झीलों का जलस्तर कम करने की तैयारी

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों के पिघलने से हिमनदीय झीलों की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसी झीलों के प्राकृतिक अवरोध टूटने पर अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है। इस घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है, जिससे निचले इलाकों में व्यापक तबाही का खतरा पैदा हो सकता है।

इसी जोखिम को कम करने के लिए नेपाल सरकार चार उच्च जोखिम वाली झीलों—थुलागी, लोअर बरुण, लुमडिंग त्शो और होंगू-2—के जलस्तर को कम करने की योजना बना रही है।

प्रस्तावित GLOF परियोजना 2026 से 2033 तक चलेगी और इसकी अनुमानित लागत 4.99 करोड़ डॉलर बताई गई है। नेपाल इससे पहले त्सो रोल्पा और इम्जा झीलों के जलस्तर को कम करने के उपाय कर चुका है। इन प्रयासों का उद्देश्य हिमनदीय झीलों के फटने से होने वाली संभावित बाढ़ के खतरे को घटाना है।

मौसम और बाढ़ पूर्वानुमान में AI का इस्तेमाल

नेपाल का जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग मौसम तथा बाढ़ संबंधी पूर्वानुमानों को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों को प्राथमिकता देने की योजना बना रहा है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं।

इन तकनीकों की मदद से मौसम और जलस्तर से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण बेहतर बनाया जा सकता है। इससे संभावित बाढ़ के जोखिम का आकलन करने और चेतावनी जारी करने की प्रक्रिया को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

नेपाल की प्रस्तावित योजनाएं बाढ़ पूर्व चेतावनी, हिमनदीय झीलों के जोखिम में कमी और तकनीक आधारित पूर्वानुमान व्यवस्था को एक साथ मजबूत करने पर केंद्रित हैं। इनका प्रभाव परियोजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर चेतावनी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगा।

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