2036 ओलंपिक की मेजबानी पर पीएम मोदी का बड़ा खेल विजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के खेल भविष्य को लेकर बड़े लक्ष्य सामने रखे। 2036 ओलंपिक की मेजबानी की आकांक्षा, 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स, गांवों से प्रतिभाओं की तलाश, खेलों में करियर और खिलाड़ियों से नई पीढ़ी को प्रेरित करने की अपील के बारे में जानिए।
Sports News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में खेलों के भविष्य को लेकर बड़े लक्ष्य सामने रखे। उन्होंने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक, 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की भारत की आकांक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को इन आयोजनों के लिए अभी से तैयारी तेज करनी होगी। उन्होंने प्रतिभाओं की पहचान करने, खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देने और खेलों से जुड़े करियर को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
2028 से 2036 तक खेलों के लिए बड़ी तैयारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में खेलों के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहता है। वर्ष 2028 में लॉस एंजिलिस ओलंपिक होंगे, जबकि 2030 में भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। इसके साथ ही 2036 ओलंपिक की मेजबानी करना भी भारत की आकांक्षा है।
उन्होंने बताया कि देश में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की तलाश और उन्हें प्रशिक्षण देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचकर प्रतिभाओं को पहचानना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, आज तैयार हो रहे खिलाड़ी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीतने की क्षमता रखते हैं।
भारत के बड़े लक्ष्य और उन्हें हासिल करने का संकल्प
पीएम मोदी ने कहा कि भारत बड़े सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास भी रखता है। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ मिलकर खेल आयोजनों, विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं और भारत को वैश्विक खेल केंद्र बनाने जैसे लक्ष्यों को हासिल करने का संकल्प दोहराया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के हर हिस्से से प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आने चाहिए और उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के लिए उचित मंच मिलना चाहिए।
एशियन गेम्स में सफलता ने दिखाया युवाओं का आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री ने एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देश के बदलते आत्मविश्वास का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार हैं और उनके सामने अवसरों का व्यापक संसार खुल रहा है।
उनके मुताबिक, देश के युवाओं की मेहनत, दृढ़ संकल्प और नई चुनौतियों को स्वीकार करने की क्षमता भारत को विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ा रही है।
स्टार्टअप, अंतरिक्ष और एआई में भी आगे बढ़ रहे युवा
पीएम मोदी ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के युवा अंतरिक्ष, सैटेलाइट तकनीक, रक्षा क्षेत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में नए प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमिता और तकनीक के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह बदलाव केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और गांवों से आने वाले युवा भी नए विचारों के साथ स्टार्टअप, रिसर्च और अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले वर्षों में विकसित व्यवस्थाओं ने युवाओं को अपने सपनों को आगे बढ़ाने का भरोसा दिया है।
खेलों में नए करियर विकल्पों पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल क्षेत्र में अवसर केवल मैदान पर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों तक सीमित नहीं हैं। स्पोर्ट्स कोचिंग, फिजियोथेरेपी, खेल प्रबंधन और स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए करियर की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
खेलों के विस्तार के साथ उनसे जुड़े पेशेवर क्षेत्रों में भी रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा हो रहे हैं। इससे युवाओं को खेलों से जुड़कर अलग-अलग भूमिकाओं में योगदान देने का मौका मिल सकता है।
खिलाड़ियों से नई पीढ़ी को प्रेरित करने की अपील
पीएम मोदी ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी को आगे बढ़ाने में भी योगदान दें। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव रखने वाले खिलाड़ी बच्चों को मार्गदर्शन दे सकते हैं और उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से अपने गांवों और शहरों में जाकर बच्चों से मिलने, स्कूलों में पहुंचने और उन मैदानों का दौरा करने की अपील की जहां से उन्होंने खेलना शुरू किया था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का अनुभव किसी बच्चे के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा बन सकता है।
खेल सिखाते हैं अनुशासन और मुश्किलों से लड़ना
प्रधानमंत्री ने खेलों के महत्व को केवल पदक और प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन, निरंतर मेहनत, हार के बाद दोबारा उठने और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की सीख देते हैं।
उनके अनुसार, लक्ष्य के प्रति समर्पण और मुश्किल परिस्थितियों में डटे रहने की भावना खिलाड़ियों को जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी मदद करती है।
‘जो खेलेगा, वो खिलेगा’
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि खेलना बच्चों और युवाओं के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने खिलाड़ियों को लगातार मेहनत करते रहने और आगे बढ़ते रहने की शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ ‘जो खेलेगा, वो खिलेगा’ का संदेश साझा करते हुए कहा कि उनका आत्मविश्वास और उत्साह नए भारत की ताकत है।
विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ विकसित भारत, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने, शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने, आत्मनिर्भर भारत, वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और तकनीक में नेतृत्व हासिल करने जैसे लक्ष्यों को दोहराया।
उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रगति, ओलंपिक की मेजबानी और नए खेलों में पदक जीतने की आकांक्षा का भी उल्लेख किया। खिलाड़ियों के साथ उन्होंने इन लक्ष्यों को हासिल करने का संकल्प व्यक्त करते हुए ‘यस, वी विल डू इट’ का उद्घोष किया।
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