PM Modi Sanskrit Subhashitam: स्वास्थ्य को बताया जीवन का आधार
पीएम मोदी ने एक्स पर चरक संहिता से जुड़े संस्कृत सुभाषित को साझा किया। इसमें आरोग्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का उत्तम आधार बताया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े एक संस्कृत सुभाषित को साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने अच्छे स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया और बताया कि स्वस्थ शरीर जीवन के महत्वपूर्ण उद्देश्यों की प्राप्ति का आधार माना गया है।
प्रधानमंत्री ने जो श्लोक साझा किया, उसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों के लिए आरोग्य को महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। यह श्लोक चरक संहिता के सूत्रस्थान के पहले अध्याय के 15वें श्लोक के रूप में दर्ज है।
क्या है संस्कृत सुभाषित?
श्लोक में कहा गया है कि वहां उपस्थित महर्षियों ने सुखपूर्वक बैठकर पुण्य कथा का वर्णन किया और धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष की प्राप्ति के लिए आरोग्य को उत्तम मूल बताया।
इसका भावार्थ है कि अच्छा स्वास्थ्य मनुष्य के जीवन के दूसरे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बुनियादी आवश्यकता है।
चरक संहिता में स्वास्थ्य का महत्व
यह श्लोक चरक संहिता के सूत्रस्थान में मिलता है। संबंधित अध्याय में अनेक ऋषियों और विद्वानों के एकत्र होकर मानव जीवन, स्वास्थ्य और रोग से जुड़े विषयों पर विचार करने का वर्णन है। इसके अगले श्लोक में रोगों को जीवन और कल्याण के लिए बड़ी बाधा बताया गया है।
भारतीय दर्शन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को जीवन के चार पुरुषार्थ माना गया है। इस संदर्भ में श्लोक स्वास्थ्य को इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मूल आधार के रूप में प्रस्तुत करता है।
स्वस्थ शरीर क्यों जरूरी है?
स्वास्थ्य बेहतर होने पर व्यक्ति दैनिक जीवन के कार्यों को अधिक सहजता से कर सकता है। शिक्षा, रोजगार, पारिवारिक जिम्मेदारियां, सामाजिक गतिविधियां और आध्यात्मिक साधना जैसे कार्य भी व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति से जुड़े होते हैं।
इसी विचार को प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा में आरोग्य के महत्व के साथ जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए सुभाषित ने इसी प्राचीन विचार को आधुनिक संदर्भ में सामने रखा है।
भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर अलग-अलग संस्कृत सुभाषित साझा करते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने धर्म, ज्ञान, अहिंसा, आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य जैसे विषयों से जुड़े संस्कृत श्लोक साझा किए हैं।
इस बार साझा किए गए सुभाषित का केंद्र स्वास्थ्य है। संदेश का मूल भाव यही है कि बेहतर स्वास्थ्य व्यक्ति के जीवन के व्यापक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने की महत्वपूर्ण आधारशिला है।
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